अल्ट्राटेक सीमेंट 5,000 करोड़ का NCD ऋण|अनुशासित बैलेंस शीट या नया लीवरेज जोखिम

· NIFTY

₹5,000 करोड़ का नया कर्ज़

अल्ट्राटेक सीमेंट के बोर्ड की फाइनेंस कमेटी ने निजी नियोजन के जरिए पांच हजार करोड़ रुपये तक जुटाने को मंजूरी दे दी है। यह राशि पांच लाख असुरक्षित, सूचीबद्ध, रिडीमेबल डिबेंचर के जरिए जुटाई जाएगी, हर एक की कीमत एक लाख रुपये होगी। यही वह कंपनी है जिसे कुछ ही दिन पहले ब्रोकरेज हाउसों ने अनुशासित बैलेंस शीट वाली कंपनी बताते हुए खरीद रेटिंग दोहराई थी।

मोतीलाल ओसवाल ने अल्ट्राटेक पर तेरह हजार आठ सौ रुपये का लक्ष्य देते हुए खरीद रेटिंग दोहराई, जिसका आधार अनुशासित लागत प्रबंधन और मजबूत बैलेंस शीट थी। निर्मल बंग ने भी तेरह हजार छह सौ बासठ रुपये के लक्ष्य के साथ यही राय दोहराई। लेकिन उसी हफ्ते कंपनी ने नया कर्ज़ जुटाने का फैसला किया, जो पहली नजर में उसी अनुशासन की कहानी से टकराता दिखता है।

पैसा किस लिए

यह कर्ज़ खाली खजाना भरने के लिए नहीं है। कंपनी की क्षमता विस्तार परियोजनाओं के लिए अगले दो से ढाई साल में करीब सत्रह हजार करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च तय है। पहली तिमाही में कंपनी की समेकित बिक्री मात्रा बारह दशमलव दो प्रतिशत बढ़ी, जबकि पूरे उद्योग की वृद्धि सात से आठ प्रतिशत के बीच रही। यानी अल्ट्राटेक बाजार हिस्सेदारी छीन रही है, और यह विस्तार उसी गति को बनाए रखने के लिए है।

जून तिमाही का समेकित शुद्ध मुनाफा सत्रह दशमलव तेईस प्रतिशत बढ़कर दो हजार छह सौ तीन करोड़ रुपये रहा, और राजस्व लगभग सोलह प्रतिशत बढ़कर चौबीस हजार छह सौ अड़तालीस करोड़ रुपये पर पहुंचा। ब्लूमबर्ग के विश्लेषक अनुमान से दोनों आंकड़े ऊपर निकले। यही मजबूत नतीजे हैं जिन्होंने ब्रोकरेज हाउसों को लक्ष्य बढ़ाने का भरोसा दिया, इसलिए विस्तार के लिए कर्ज़ लेना कमजोरी नहीं बल्कि आक्रामक विस्तार का संकेत भी हो सकता है।

छिपी हुई शर्त

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी अतुल डागा ने कमाई कॉल में साफ कहा कि जून तक नेट डेट-टू-एबिटा अनुपात शून्य दशमलव सत्तासी गुना है, और उन्हें भरोसा है कि यह अनुपात इस वित्त वर्ष के अंत तक एक गुने से नीचे ही रहेगा। ब्रोकरेज हाउसों ने अपने लक्ष्य इसी भरोसे पर टिकाए हैं। लेकिन यही वह मान्यता है जिसे नया कर्ज़ परखने वाला है, अनुशासन का दावा तभी टिकता है जब नया कर्ज़ इस अनुपात को पार न कराए।

प्रबंधन ने खुद आगाह किया है कि दूसरी तिमाही में ईंधन, मानसून और भट्टी रखरखाव की वजह से मुनाफा दबाव में रह सकता है, और परिवर्तनीय लागत प्रति टन एक सौ तीस से एक सौ चालीस रुपये तक बढ़ सकती है। यह वही तिमाही होगी जब नया कर्ज़ बैलेंस शीट पर असर डालना शुरू करेगा। ब्याज दर और अवधि की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए यह अनुपात कितना दबाव झेल पाएगा, यह अभी खुला सवाल है।

जो पहले से शेयर रखते हैं उनके लिए संकेत साफ है: NCD की ब्याज दर और अवधि सार्वजनिक होते ही यह नया कर्ज़ उस शून्य दशमलव सत्तासी गुने के अनुपात को कितना बढ़ाता है, यह देखना होगा। जो अभी बाहर से देख रहे हैं उनके लिए दूसरी तिमाही के नतीजे निर्णायक होंगे, जहां बढ़ी हुई लागत और नए कर्ज़ का संयुक्त असर पहली बार दिखेगा। अगर अनुपात एक गुने से नीचे टिका रहता है तो यह विस्तार अवसर साबित होगा, और अगर वह अनुपात फिसलता है तो वही ब्रोकरेज भरोसा जाल में बदल सकता है। अगली तिमाही की लागत रिपोर्ट और NCD की शर्तें ही इस सवाल का जवाब देंगी।

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