ईरान संघर्षविराम|सेंसेक्स की तेज़ी के पीछे की असली दरार
तेल गिरा, बाज़ार उड़ा
6 मई को सेंसेक्स 941 अंक उछला — लेकिन जिस खबर ने यह तेज़ी लाई, उसमें कोई समझौता नहीं हुआ, सिर्फ एक संकेत था।
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने कहा कि "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी समाप्त हो गया" और राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एस्कॉर्ट ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोकने का संकेत दिया। इस एक खबर ने ब्रेंट क्रूड को दो दिनों में 5% से अधिक गिरा दिया — $110 प्रति बैरल के नीचे।
यहाँ कार्य-कारण सीधा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया की 20% तेल आपूर्ति का रास्ता है। 28 फरवरी से बंद इस रास्ते ने भारत को सबसे ज़्यादा चोट पहुँचाई — भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। जब तेल सस्ता हुआ, तो भारत के बॉन्ड बाज़ार ने तुरंत राहत महसूस की — 10 साल का सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.02% से गिरकर 6.98% पर आ गया। रुपया 24 पैसे मज़बूत होकर 94.95 पर पहुँचा। और शेयर बाज़ार में निफ्टी 24,300 के ऊपर बंद हुआ।
लेकिन यह तेज़ी एक शर्त पर टिकी है। अभी तक ईरान की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं आया है। ट्रम्प ने "डील की ओर प्रगति" कही — लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई। MCX सोना 28 फरवरी से 7% नीचे है, जो दर्शाता है कि बाज़ार पहले से ही शांति की उम्मीद में दाँव लगा रहा है। अगर वार्ता टूट जाती है, तो यह 941 अंक की तेज़ी उतनी ही तेज़ी से उलट सकती है।
FII गए, DII आए — पर दरार बाकी है
जबकि आज की तेज़ी उत्साहजनक थी, एक और कहानी इसके नीचे चल रही है — और वह कहानी बताती है कि यह बाज़ार किस नींव पर खड़ा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 2026 के पहले चार महीनों में ₹1.98 लाख करोड़ की बिकवाली की है। मार्च में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद केवल एक महीने में $14.2 अरब की निकासी हुई। MSCI India Index इस साल 6% नीचे है। निफ्टी-500 में FII की हिस्सेदारी रिकॉर्ड निचले स्तर 17.1% पर आ गई है।
इस खालीपन को भरा है घरेलू संस्थागत निवेशकों ने — DII होल्डिंग 20.9% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँच गई है, जो SIP के निरंतर प्रवाह से संभव हुई। $27.2 अरब इस साल DII ने लगाए हैं। ब्लैकरॉक के बेन पॉवेल इसे भारत की "मूल्यांकन रिसेट" कहते हैं — निफ्टी अब 20.2x forward PE पर है, जो 10 साल के औसत के करीब है।
लेकिन यहाँ एक जटिलता है। FII क्यों नहीं आ रहे? दो कारण हैं — AI ट्रेड और ऊर्जा संकट। ताइवान, कोरिया और चीन में AI निवेश की होड़ के बीच भारत को "कम AI-लिंक्ड" माना जा रहा है। और ऊर्जा महंगाई भारत के व्यापार घाटे को $68 अरब के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स घाटे की ओर धकेल रही है। RBI विदेशी बॉन्ड जारी करने पर विचार कर रही है — वही रास्ता जो 1998 और 2000 में अपनाया गया था।
अगर होर्मुज़ रास्ता खुलता है, तो FII वापसी तेज़ हो सकती है — और तब निफ्टी की 24,600 की बाधा एक नई बुल मार्केट की शुरुआत बन सकती है।
TCS-Infosys की नई चुनौती
तेल की राहत और FII की वापसी की उम्मीद के बीच, भारतीय IT सेक्टर एक तीसरे मोर्चे पर दबाव में है — और इस बार यह दबाव AI से आ रहा है।
OpenAI और Anthropic अब सिर्फ मॉडल नहीं बना रहे। Reuters के अनुसार, OpenAI "The Deployment Company" नाम से एक नया वेंचर शुरू करने वाला है — TPG, Bain Capital और Brookfield का पैसा इसमें लगेगा। Anthropic भी Blackstone और Goldman Sachs के साथ एंटरप्राइज़ AI सर्विसेज़ बिज़नेस बना रहा है। यह सीधे उस $300 अरब के IT सेवा बाज़ार पर निशाना है जहाँ TCS, Infosys और Wipro का दबदबा है।
कारण-श्रृंखला यह है: AI कंपनियाँ मॉडल बनाने से आगे बढ़कर "enterprise deployment" की परत पर कब्ज़ा करना चाहती हैं — वही परत जहाँ भारतीय IT कंपनियाँ सबसे ज़्यादा मार्जिन कमाती हैं। EY India के नितिन भट्ट के अनुसार, PE फर्मों के साथ यह साझेदारी "AI strategy consulting और business transformation work" को निशाना बनाती है।
भारतीय IT का जवाब अभी धीमा है। FY27 में TCS, Infosys, HCLTech की औसत राजस्व वृद्धि 2-5% रहने का अनुमान है। TCS अभी 16.7x PE पर ट्रेड कर रहा है — 2008 के बाद के सबसे निचले स्तर के करीब। Infosys 17.6x पर है। ये मूल्यांकन तब बनते हैं जब बाज़ार को पता नहीं कि अगला पाँच साल कैसा दिखेगा।
अगर होर्मुज़ शांति होती है, FII लौटते हैं, और IT कंपनियाँ AI transformation में अपनी जगह बनाए रखती हैं — तो ये valuation ऐतिहासिक खरीद का मौका होगा। लेकिन अगर OpenAI और Anthropic की PE-backed expansion तेज़ होती है, तो 2-5% की वृद्धि अनुमान भी आशावादी साबित हो सकते हैं। कल देखने वाली बात: निफ्टी IT 24,600 के ऊपर टिकता है या नहीं — और ट्रम्प-ईरान वार्ता से कोई ठोस खबर आती है या नहीं।