एक्सिस बैंक मुनाफा 23% उछला|शेयर फिर भी 6% क्यों टूटा

· NIFTY

मुनाफा बनाम शेयर की गिरावट

एक्सिस बैंक ने जून तिमाही में शुद्ध लाभ में 23 प्रतिशत की उछाल दर्ज की, जो 7,114 करोड़ रुपये तक पहुंचा। इसके बावजूद बैंक का शेयर सोमवार को करीब 6 प्रतिशत तक टूटा, जो पिछले दो साल की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावटों में से एक है।

मुनाफे में मजबूत उछाल के बावजूद बाजार ने पुरस्कार नहीं, सजा दी। सवाल यह है कि निवेशक किस आंकड़े को इतनी गंभीरता से ले रहे हैं कि मुनाफे की खबर भी बेअसर हो गई।

जवाब बैंक के ब्याज मार्जिन में छिपा है, जो घटकर 3.46 प्रतिशत पर आ गया। प्रबंधन इसे साइकिल का सबसे निचला स्तर बता रहा है, लेकिन बाजार अभी इस दावे पर भरोसा करने को तैयार नहीं दिखा।

प्रबंधन बनाम ब्रोकरेज की राय

एक्सिस बैंक के एमडी अमिताभ चौधरी ने कमाई कॉल में कहा कि 3.46 प्रतिशत का मार्जिन इस चक्र का सबसे निचला स्तर है। उन्होंने एफसीएनआर-बी जमा से मिली अतिरिक्त तरलता को आगे वृद्धि का आधार बताया।

मोतीलाल ओसवाल ने हालांकि एक्सिस बैंक पर न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी और 2027-28 के मुनाफा अनुमान करीब 2 प्रतिशत घटा दिए। ब्रोकरेज ने कमजोर मार्जिन को तिमाही की सबसे बड़ी निराशा बताया, टारगेट प्राइस 1,500 रुपये, यानी केवल 13 प्रतिशत की बढ़त का संकेत।

उसी दिन आईसीआईसीआई बैंक का शेयर करीब आधा प्रतिशत ऊपर बंद हुआ, क्योंकि उसका मार्जिन सुधरकर 4.36 प्रतिशत पहुंच गया। यानी बाजार पूरे बैंकिंग सेक्टर को नहीं, बल्कि सिर्फ मार्जिन दबाव झेल रहे बैंकों को सजा दे रहा था।

सवाल यह रह जाता है कि क्या एक्सिस बैंक का मार्जिन वाकई तल छू चुका है, जैसा प्रबंधन कह रहा है, या यह गिरावट अभी बाकी है, जैसा ब्रोकरेज की सतर्कता संकेत देती है।

बैंकिंग सेक्टर में असली बंटवारा

आनंद राठी की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार सरकारी बैंक लगातार सात तिमाहियों से निजी बैंकों की तुलना में तेज़ कर्ज वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। एक्सिस, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई जैसे बड़े निजी बैंकों की रिटेल लोन ग्रोथ लगातार पांच तिमाहियों से एक अंक में सिमटी हुई है।

इसी असर से सोमवार को निफ्टी बैंक करीब 700 अंक और सेंसेक्स भी 700 से ज्यादा अंक टूटा, जिसकी अगुआई एचडीएफसी, एक्सिस और कोटक महिंद्रा बैंक ने की। इसके उलट पीएनबी, कैनरा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे नाम उसी दिन बढ़त में रहे।

यानी असली विभाजन बैंकिंग सेक्टर बनाम बाकी बाजार का नहीं, बल्कि उन बैंकों का है जिनका मार्जिन टिका हुआ है और उनका जिनका मार्जिन अभी भी फिसल रहा है। एक्सिस बैंक अभी इस विभाजन रेखा के ठीक किनारे पर खड़ा दिखता है।

आगे किस संकेतक पर नजर

आरबीआई के नए एफसीएनआर-बी नियमों से बैंकिंग सिस्टम में 40 से 60 अरब डॉलर तक नई जमा आने की उम्मीद है, जो जमा वृद्धि दर में डेढ़ से दो प्रतिशत अंक तक जोड़ सकती है। यह आंकड़ा अगली तिमाही नतीजों से पहले ही सामने आ जाएगा।

मौजूदा निवेशकों के लिए संकेत साफ है, अगर अगली तिमाही में मार्जिन 3.46 प्रतिशत से और नीचे फिसलता है तो ब्रोकरेज की सतर्कता सही साबित होगी। लेकिन अगर मार्जिन इसी स्तर पर टिका रहता है या सुधरता है तो प्रबंधन का तल वाला दावा मजबूत होगा।

नए निवेशकों के लिए फैसला जमा आंकड़ों पर टिका है, अगली तिमाही नतीजों से पहले आने वाला एफसीएनआर-बी जमा प्रवाह और जमा वृद्धि दर ही बताएगी कि मौजूदा गिरावट खरीद का मौका है या जाल।

जब तक यह जमा आंकड़ा और अगली तिमाही का मार्जिन स्तर सामने नहीं आता, तब तक निर्णय इसी एक संकेतक पर टिका रहेगा।

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