कॉफोर्ज|49% ग्रोथ के पीछे सिर्फ 1.1% असली उछाल

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शेयर में उछाल और हेडलाइन नंबर

कॉफोर्ज के शेयर मंगलवार को दस प्रतिशत से ज्यादा उछल गए, जो छह मई के बाद की सबसे बड़ी इंट्राडे तेजी है। यह उछाल जून तिमाही के नतीजों के बाद आया, जिसमें कंपनी ने कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में उनचास दशमलव दो प्रतिशत की सालाना ग्रोथ दिखाई।

कंपनी ने प्रति शेयर चार रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया और चीन में नई इकाई बनाने की मंजूरी दी। मुनाफा पिछले साल की तुलना में एक सौ दस प्रतिशत ज्यादा बताया गया, जिसने निवेशकों में उत्साह भर दिया।

लेकिन इन नंबरों के पीछे एक बड़ा सवाल छिपा है। क्या यह ग्रोथ कंपनी के अपने कारोबार से आई है, या यह किसी और वजह से बढ़ी हुई दिख रही है।

एनकोरा बनाम असली ऑर्गेनिक ग्रोथ

इस तिमाही में पहली बार एनकोरा होल्डिंग्स का कंसॉलिडेशन जोड़ा गया। सिकुएंशियल आधार पर डॉलर रेवेन्यू में एक सौ तीन दशमलव एक मिलियन डॉलर की बढ़त हुई, जिसमें से अकेले एनकोरा ने एक सौ दशमलव सात मिलियन डॉलर का योगदान दिया।

अधिग्रहण का असर हटाकर देखें तो कंपनी की असली सिकुएंशियल कॉन्स्टेंट-करेंसी ग्रोथ सिर्फ एक दशमलव एक प्रतिशत रही। भारत सरकार वाले कम-मार्जिन पोर्टफोलियो से जानबूझकर बाहर निकलने का असर हटाने पर यह पांच दशमलव दो प्रतिशत तक पहुंचती है।

मुनाफे का सौ दस प्रतिशत उछाल भी तुलनीय आधार पर सही नहीं है। पिछले साल की तिमाही में बंद हो चुके कारोबार से भी मुनाफा शामिल था, और उसे जोड़कर तुलना करने पर असली बढ़त तिरसठ दशमलव चार प्रतिशत बैठती है, सौ दस प्रतिशत नहीं। इसका मतलब है कि हेडलाइन नंबर स्केल इफेक्ट से बढ़े हुए दिख रहे हैं, कारोबार की असली रफ्तार से नहीं।

कर्ज का बोझ और ब्रोकरेजों की बंटी राय

एनकोरा को फंड करने के लिए कॉफोर्ज ने पांच सौ पचास मिलियन डॉलर का कर्ज चार दशमलव छह प्रतिशत ब्याज पर लिया। मूल राशि की वापसी अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही से शुरू होकर 2030 तक चलेगी।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने चेताया कि बढ़ा हुआ अमॉर्टाइजेशन और ब्याज खर्च ईबिट के नीचे की मुनाफे और कैश फ्लो पर दबाव डाल सकता है। वहीं दूसरी तरफ नोमुरा ने कॉफोर्ज को मिड-कैप आईटी में अपना टॉप पिक बताया और मोतीलाल ओसवाल ने तीन हजार रुपये के लक्ष्य के साथ चौवन प्रतिशत उछाल की संभावना जताई।

यह एक ही तिमाही के नतीजों पर दो बिल्कुल अलग निष्कर्ष हैं। एक ब्रोकरेज कर्ज की चिंता जता रहा है, तो दूसरा उसी नतीजे को दीर्घकालिक ताकत का सबूत मान रहा है, और यह मतभेद खुद स्रोत लेखों में दर्ज है, किसी अनुमान से नहीं।

आगे क्या देखना है

राहत की बात यह है कि कंपनी का ऑर्गेनिक ईबिट मार्जिन सोलह दशमलव सात प्रतिशत रहा, जो कंपनी के अपने पंद्रह दशमलव पांच प्रतिशत के फुल-ईयर गाइडेंस से ऊपर है। इससे पता चलता है कि अधिग्रहण के बावजूद ऑपरेशनल एक्जीक्यूशन फिलहाल मजबूत बना हुआ है।

असली परीक्षा तीसरी तिमाही से शुरू होगी, जब कर्ज की मूल राशि की वापसी शुरू होगी और ब्याज का पूरा असर मुनाफे पर दिखेगा। अगर उस समय भी मार्जिन गाइडेंस से ऊपर बना रहता है, तो यह साबित करेगा कि एनकोरा एकीकरण वाकई कंपनी को मजबूत कर रहा है।

फिलहाल कॉफोर्ज की तेजी को स्केल के जश्न के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या यह स्केल टिकाऊ मुनाफे में बदलेगा। अगली दो तिमाहियों में कर्ज चुकौती और मार्जिन के आंकड़े ही यह तय करेंगे कि आज की तेजी जायज थी या जल्दबाजी।

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