टाटा पावर|मुनाफा बढ़ा, शेयर गिरा 372

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मुनाफा तो बढ़ा, पर शेयर गिरा क्यों

टाटा पावर ने जून तिमाही में शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, जो 1,401 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। राजस्व भी 8 प्रतिशत बढ़कर 18,898 करोड़ रुपये रहा, जो विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर था। इसके बावजूद मंगलवार को कंपनी का शेयर लगभग 1.4 प्रतिशत गिरकर कारोबार करता रहा।

शेयर पिछले बंद भाव 377.35 रुपये से ऊपर 382 रुपये पर खुला और इंट्राडे में 383.50 रुपये तक गया, लेकिन फिर फिसलकर 371.30 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। यानी नतीजों के आंकड़े मजबूत थे, पर बाजार की प्रतिक्रिया ठीक उलट रही। कंपनी ने खुद बताया कि निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली की।

यह मुनाफावसूली सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कमाई की गुणवत्ता का सवाल भी था। कंपनी का समेकित एबिटा सालाना आधार पर 3 प्रतिशत घटकर 4,013 करोड़ रुपये रह गया, जबकि विश्लेषकों के अनुमान से यह बेहतर जरूर था। तिमाही में कंपनी ने अब तक का सबसे बड़ा 5,375 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च किया, और सोलर मैन्युफैक्चरिंग कारोबार का मुनाफा चार गुना बढ़कर 371 करोड़ रुपये हो गया।

विकास की कहानी बनाम रेटिंग की सीमा

कंपनी के प्रबंधन ने निवेशक कॉल में महत्वाकांक्षी योजनाएं सामने रखीं। सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कहा कि रूफटॉप सोलर कारोबार का राजस्व 2029 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है, जो पहले के अनुमान से एक साल पहले है। इसके साथ ही बाजार हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की योजना है, जबकि दूसरे नंबर का प्रतिस्पर्धी मात्र 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।

कंपनी ने 2030 तक ट्रांसमिशन कारोबार में 40,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की योजना बताई, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये अकेले मुंबई परियोजना के लिए हैं। इसके अलावा ओडिशा में 6,600 करोड़ रुपये की लागत से 10 गीगावाट क्षमता का वेफर और इंगॉट संयंत्र अक्टूबर से बनना शुरू होगा। साथ ही न्यूक्लियर पावर में प्रवेश के लिए मध्य प्रदेश, ओडिशा और गुजरात में जमीन तय करने का काम भी अंतिम चरण में है।

इतनी बड़ी विस्तार योजनाओं के बावजूद ब्रोकरेज मॉर्गन स्टैनली ने शेयर पर 'इक्वल वेट' रेटिंग बरकरार रखी और लक्ष्य भाव 399 रुपये तय किया, जो शेयर के 414 रुपये के बंद भाव से नीचे है। यानी ब्रोकरेज की नजर में मौजूदा कीमत में आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है। ब्रोकरेज ने कहा कि मुंद्रा प्लांट से जुड़े बिजली खरीद समझौते जून तक पूरे होने से आय की स्पष्टता बढ़ेगी, लेकिन यह भविष्य की शर्त पर टिका है।

मुंद्रा और कर्ज़ जोड़ने वाली अनिश्चितता

नौ महीने बंद रहने के बाद अप्रैल में दोबारा शुरू हुए मुंद्रा थर्मल प्लांट ने इस तिमाही में 447 करोड़ रुपये का एबिटा और 20 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ जोड़ा। गुजरात के साथ बिजली खरीद समझौता हो चुका है, लेकिन हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के साथ समझौते अगस्त तक और महाराष्ट्र के साथ सितंबर तक पूरे होने की उम्मीद है। तब तक प्लांट सरकार के सेक्शन 11 निर्देश के तहत चल रहा है, जिसकी वैधता 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।

इसी तिमाही में बोर्ड ने निजी नियोजन के आधार पर 4,500 करोड़ रुपये तक के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर या अन्य ऋण साधन जारी करने को मंजूरी दी। यह भारी विस्तार योजनाओं के लिए अतिरिक्त कर्ज जुटाने की जरूरत दिखाता है, और भविष्य में ब्याज लागत तथा तुलन-पत्र पर दबाव का सवाल खड़ा करता है।

टाटा पावर की तिमाही आंकड़ों के हिसाब से मजबूत रही, और कंपनी की विस्तार योजनाएं भी दूरगामी नजर आती हैं। लेकिन शेयर की गिरावट और मॉर्गन स्टैनली की सतर्क रेटिंग बताती है कि बाजार पहले ही इस विकास कहानी की बड़ी कीमत लगा चुका है। जो लोग शेयर पहले से रखते हैं उनके लिए मुंद्रा के बाकी राज्यों से समझौते और नियमित एबिटा वृद्धि की पुष्टि अगला अहम संकेत होगी, जबकि नए निवेशकों के लिए मौजूदा भाव में तुरंत बड़ी बढ़त की गुंजाइश ब्रोकरेज अनुमान के हिसाब से सीमित दिखती है।

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