बैंडन बैंक 35% मुनाफ़ा, फिर भी 18% क्रैश|RoA गाइडेंस कट से 33,568 करोड़ साफ़

· NIFTY

मुनाफ़ा 35% ऊपर, फिर भी शेयर क्रैश

बैंडन बैंक ने जून तिमाही में 501 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफ़ा दर्ज किया, जो पिछले साल से 35% ज़्यादा है। इसके बावजूद बुधवार को शेयर एक ही सत्र में 18% से ज़्यादा टूट गया और बैंक का बाज़ार पूंजीकरण करीब 33,568 करोड़ रुपये कम हो गया।

एसेट क्वालिटी भी सुधरी है — ग्रॉस एनपीए 3.27% से घटकर 3.15% पर आ गया। जब हर पैमाने पर सुधार दिख रहा है, तो निवेशकों ने इतनी तेज़ बिकवाली क्यों की, यह सवाल सीधे प्रबंधन के मंगलवार शाम के नतीजों के बाद के कॉन्फ़्रेंस कॉल की तरफ़ ले जाता है।

बुधवार के पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में प्रबंधन ने वित्त वर्ष 27 की एग्ज़िट रिटर्न ऑन एसेट्स यानी RoA गाइडेंस को 1.6 से 1.8 प्रतिशत से घटाकर 1.2 से 1.4 प्रतिशत कर दिया। यही वह अकेला बयान था जिसने पूरे बाज़ार का रुख़ पलट दिया।

एक ही कट, दो विपरीत नतीजे

बैंकिंग शेयरों में बाज़ार बीती तिमाही को नहीं, आगे की दिशा को दाम देता है। इसलिए मात्र 20 आधार अंकों की गाइडेंस कटौती ने 35% मुनाफ़ा वृद्धि से भी बड़ा असर डाल दिया — प्रबंधन ने खुद कहा कि जमा लागत बढ़ने और मार्जिन पर दबाव अगली दो तिमाहियों तक बना रह सकता है।

यहीं से ब्रोकरेज हाउसों में साफ़ मतभेद दिखता है। मोतीलाल ओसवाल ने रेटिंग बाय से घटाकर होल्ड कर दी और वित्त वर्ष 27-28 की कमाई का अनुमान 14% और 6% घटा दिया। इसके उलट जेफ़रीज़ ने बाय रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस 215 से बढ़ाकर 240 रुपये कर दिया, यह कहते हुए कि तिमाही नतीजे अनुमान से बेहतर रहे।

JP मॉर्गन ने न्यूट्रल रेटिंग के साथ 175 रुपये का टारगेट बरकरार रखा, जो मंगलवार के बंद भाव से करीब 15% नीचे है। उसने कहा कि RoA कटौती में करीब 30 आधार अंक मार्जिन दबाव से और 10 आधार अंक तकनीक पर बढ़े खर्च से आए हैं।

एक ही गाइडेंस कट पर JM फ़ाइनेंशियल ने तिमाही को कमज़ोर बताया, जबकि ICICI सिक्योरिटीज़ ने इसे ठीकठाक तिमाही करार दिया जिस पर सिर्फ़ गाइडेंस कट का साया पड़ा। छिपी हुई मान्यता यह है — जो ब्रोकरेज मार्जिन दबाव को अस्थायी मानता है वह खरीद की सलाह देता है, और जो इसे संरचनात्मक मानता है वह बिकवाली की।

अगली दो तिमाही ही तय करेंगी दिशा

इस तिमाही नेट इंटरेस्ट मार्जिन 6.2% पर स्थिर रहा, लेकिन प्रबंधन ने साफ़ कहा कि जमा दरों में प्रतिस्पर्धा और बढ़ी लागत की वजह से अगली दो तिमाहियों में यह दबाव में रह सकता है। यही वह चर है जो असली फ़ैसला तय करेगा, तिमाही दर तिमाही घोषित होने वाला RoA आंकड़ा नहीं।

अगर अगली तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन 6.2% के आसपास टिका रहता है, तो मौजूदा गिरावट एक एंट्री अवसर के तौर पर पढ़ी जा सकती है, क्योंकि एसेट क्वालिटी और मुनाफ़ा वृद्धि पहले से मज़बूत है। लेकिन अगर मार्जिन 6.2% से और नीचे खिसकता है, तो यह पुष्टि करेगा कि गाइडेंस कट कोई अस्थायी सावधानी नहीं बल्कि संरचनात्मक दबाव था।

मौजूदा निवेशकों के लिए ट्रिगर अगली तिमाही की मार्जिन घोषणा है, न कि आज की किमत। और जो निवेशक अभी बाहर हैं, उनके लिए भी वही आंकड़ा तय करेगा कि यह गिरावट खरीद का मौका थी या चेतावनी। अगली नेट इंटरेस्ट मार्जिन घोषणा से पहले किसी नई पोज़ीशन का फ़ैसला जल्दबाज़ी होगा।

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