ब्लूस्टोन ज्वेलरी 20% अपर सर्किट|सोने की ड्यूटी दोगुनी होने पर भी मुनाफा

· NIFTY

बीस प्रतिशत का उछाल

बेंगलुरु की ज्वेलरी कंपनी ब्लूस्टोन के शेयर आज बीस प्रतिशत के अपर सर्किट पर पहुंच गए, जो लिस्टिंग के बाद इसका सबसे बड़ा एक-दिन का उछाल है। यह उछाल पहली तिमाही के नतीजों के बाद आया, जहां कंपनी ने लगातार तीसरी बार मुनाफे वाली तिमाही दर्ज की।

लेकिन यही वह तिमाही थी जब सरकार ने सोने पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत कर दिया। एक ज्वेलरी रिटेलर के लिए यह सीधे कच्चे माल की लागत पर चोट है। सवाल यह है कि जिस लागत के झटके ने मार्जिन को दबाना था, उसी तिमाही में मुनाफा कैसे बढ़ गया।

आंकड़े देखें तो कंपनी का समेकित राजस्व उनतालीस प्रतिशत बढ़कर लगभग साढ़े सात सौ करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को लगभग पैंतीस करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। यह घाटे से मुनाफे की ओर पलटाव बताता है कि कहीं न कहीं लागत के दबाव को मांग ने पूरी तरह अवशोषित कर लिया।

लागत बनाम मांग की टक्कर

पारंपरिक तर्क सीधा है। जब सोना महंगा होता है, ग्राहक खरीद टालते हैं, और जब सरकार उस पर ड्यूटी और बढ़ा देती है, तो हर ग्राम पर लागत का बोझ रिटेलर या ग्राहक में से किसी एक को उठाना पड़ता है। यही वजह है कि गोल्ड ड्यूटी बढ़ने की खबर आते ही ज्वेलरी शेयरों में आमतौर पर सतर्कता आती है।

मगर ब्लूस्टोन की सेम-स्टोर बिक्री वृद्धि, यानी पुराने स्टोरों की बिक्री में इजाफा, इसी तिमाही में सकारात्मक बनी रही। कंपनी के सीईओ गौरव सिंह कुशवाहा ने खुद कहा कि यह प्रदर्शन खास तौर पर संतोषजनक है क्योंकि यह सोने पर ड्यूटी छह से पंद्रह प्रतिशत होने के बावजूद आया।

अगर ग्राहक ने खरीदारी नहीं टाली, और कंपनी का मार्जिन भी नहीं टूटा, तो ड्यूटी बढ़ने से पैदा हुई अतिरिक्त लागत आखिर किसने वहन की। यही वह दरार है जो सतही पढ़ाई नहीं समझा पाती, और अगले चरण में इसका जवाब तलाशना जरूरी हो जाता है।

स्टोर विस्तार का दबा हुआ आधार

बाजार की धारणा यह मान कर चलती है कि ज्वेलरी रिटेलर का प्रदर्शन मुख्यतः सोने की कीमत की दिशा से तय होता है। लेकिन ब्लूस्टोन के आंकड़े इस मान्यता को चुनौती देते हैं, क्योंकि कंपनी का असली इंजन कीमत नहीं, बल्कि स्टोर नेटवर्क का विस्तार और दोहराव वाली खरीद है।

तिमाही के दौरान कंपनी ने बारह नए स्टोर जोड़े, जिससे इसका नेटवर्क एक सौ उनतालीस शहरों में तीन सौ बावन स्टोर तक पहुंच गया। नए शहरों में प्रवेश टियर-टू और टियर-थ्री बाजारों में हुआ, जहां प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम है और मांग अभी संतृप्त नहीं हुई है।

असली तस्वीर यह है कि ड्यूटी बढ़ने का असर मौजूदा स्टोरों के मार्जिन पर पड़ता है, लेकिन नए शहरों में हर नया स्टोर राजस्व की एक बिल्कुल नई परत जोड़ता है जो पुराने आधार से स्वतंत्र होती है। यही विस्तार वाली परत है जिसने ड्यूटी के दबाव को कुल आंकड़ों में दबा दिया, न कि किसी जादुई मांग-प्रतिरोध ने।

यह ऑपरेटिंग लीवरेज सीएनबीसी टीवी अठारह की रिपोर्ट में भी झलकता है, जहां कंपनी का प्री-इंड एएस एबिटडा मार्जिन साढ़े सात प्रतिशत रहा, जो पिछले साल से दो सौ तिहत्तर आधार अंक ऊपर है। मार्जिन विस्तार बताता है कि स्केल का फायदा ड्यूटी की लागत से आगे निकल गया।

अगला संकेत क्या तय करेगा

पूल में उपलब्ध रिपोर्टों में इस बात का कोई सीधा प्रति-तर्क नहीं मिलता कि यह वृद्धि अस्थायी है, लेकिन जोखिम स्पष्ट रहता है। स्टोर विस्तार जब तक नए शहरों में मांग को बनाए रखता है, तब तक यह मॉडल टिकता है। अगर सोने की कीमत और ड्यूटी दोनों साथ में और ऊपर जाती हैं, तो नए बाजारों की खरीद क्षमता भी दबाव में आ सकती है।

जो निवेशक पहले से शेयर रखते हैं, उनके लिए अगली तिमाही की सेम-स्टोर बिक्री वृद्धि और नए स्टोर जुड़ने की रफ्तार ही सबसे तेज़ जांच बिंदु है, न कि सालाना नतीजे का इंतजार। अगर यह वृद्धि तीन-चार प्रतिशत के दायरे में बनी रहती है, तो आज की चाल एक प्रवेश-योग्य ढांचा साबित होती है, ट्रैप नहीं।

जो अभी बाहर हैं, उनके लिए निगरानी का पैमाना सोने की कीमत की दिशा नहीं, बल्कि नए शहरों में स्टोर-स्तर के मार्जिन का रुझान होना चाहिए। अगर विस्तार वाले स्टोर पुराने स्टोरों जैसा मार्जिन नहीं पकड़ पाते, तो यही उछाल जल्दी ट्रैप में बदल सकता है। यही वह एक संकेत है जिसे अगली तिमाही से पहले देखना जरूरी है।

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