मारुति सुज़ुकी|रिकॉर्ड बिक्री, फिर भी मुनाफ़ा 11% गिरा

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रिकॉर्ड बिक्री का जश्न

मारुति सुज़ुकी ने जुलाई 2026 में घरेलू बाज़ार में पहली बार दो लाख यूनिट्स की बिक्री पार कर ली, कुल बिक्री सालाना आधार पर करीब 34 से 42 प्रतिशत बढ़ी। यह कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी मासिक उपलब्धि है। छोटी कारों की बिक्री तिमाही में 34.1 प्रतिशत बढ़ी, जिससे कंपनी का बाज़ार हिस्सा 41.2 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो एक साल पहले से 2.3 प्रतिशत अंक ज़्यादा है।

लेकिन इसी रिकॉर्ड तिमाही में मारुति का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 9.1 से 11 प्रतिशत घटकर 3,352 से 3,447 करोड़ रुपये रह गया। सवाल यह है कि जब बिक्री और बाज़ार हिस्सेदारी दोनों रिकॉर्ड स्तर पर हैं, तो मुनाफ़ा नीचे क्यों गया।

कंपनी के अनुसार कमोडिटी महंगाई ने मार्जिन को लगभग 300 आधार अंकों तक घटा दिया। एल्युमिनियम, प्लास्टिक और रबर जैसी वस्तुओं की बढ़ती लागत सीधे उत्पादन खर्च पर असर डाल रही है, जबकि राजस्व में मज़बूत बढ़ोतरी के बावजूद संचालन खर्च तेज़ी से बढ़ा।

आपूर्तिकर्ताओं को बचाने का फैसला

मारुति ने जानबूझकर एक अतिरिक्त फैसला लिया, कंपनी ने अस्थिर बाज़ार में आपूर्तिकर्ताओं के नकदी प्रवाह को सहारा देने के लिए एल्युमिनियम, प्लास्टिक और रबर जैसी वस्तुओं का भुगतान चक्र तिमाही से मासिक कर दिया। इस एक फैसले से मार्जिन पर अतिरिक्त 110 आधार अंकों का बोझ पड़ा।

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी राहुल भारती ने साफ कहा कि यह आपूर्ति निरंतरता और आपूर्तिकर्ता तंत्र को सहारा देने के लिए सोच-समझकर लिया गया अस्थायी कदम था। कंपनी को उम्मीद है कि अगली कुछ तिमाहियों में भुगतान चक्र धीरे-धीरे तिमाही प्रारूप में लौटेगा, जिससे कुछ लागत असर उलट सकता है। मतलब यह मुनाफ़े में गिरावट परिचालन कमज़ोरी नहीं बल्कि आपूर्ति शृंखला को स्थिर रखने की कीमत है।

आपूर्ति ही असली बाधा

तिमाही के अंत में डीलर इन्वेंट्री महज़ 13 दिन की रह गई, जो कंपनी के आदर्श स्तर एक महीने से काफी कम है। इसके उलट लंबित ऑर्डर बुक करीब 1,30,000 यूनिट्स पर बनी हुई है। भारती के अनुसार साल की शुरुआत में ही अनुमान था कि इस साल बिक्री मांग से नहीं बल्कि आपूर्ति क्षमता से सीमित रहेगी, और मांग पक्ष अब भी मज़बूत बना हुआ है।

कंपनी ने हरियाणा के खरखौदा और गुजरात के हांसलपुर में नई उत्पादन लाइनें शुरू की हैं, हर एक से सालाना ढाई लाख यूनिट्स की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी। कंपनी ने अपने 10 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्य को बरकरार रखा है और कहा है कि असली सवाल यह है कि नई क्षमता कितनी तेज़ी से पूरी क्षमता पर पहुंचती है। जब तक आपूर्तिकर्ता भुगतान चक्र सामान्य नहीं होता और नई क्षमता पूरी रफ़्तार नहीं पकड़ती, तब तक रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद मार्जिन दबाव में बने रहने की आशंका है।

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