DII हससदर 21% रकरड|FII क 1.98 लख करड बकवल क बद भ Nifty ऊपर कय
6 मई: Sensex 941 अंक उछला, लेकिन असली कहानी कहीं और थी
6 मई को Sensex 941 अंक की छलांग लगाकर 78,553 पर बंद हुआ। Nifty 50 ने 24,300 का स्तर पार किया। बाजार में जश्न था, वजह थी अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की खबरें। ब्रेंट क्रूड दो सत्रों में 6 फीसदी लुढ़क गया, 110 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। रुपया 24 पैसे मजबूत होकर 94.95 पर खुला।
लेकिन उस तेजी के नीचे एक अलग ही कहानी पक रही थी।
Bharti Airtel, Mahindra and Mahindra और वित्तीय शेयरों ने बाजार को आगे खींचा। IndiGo 3 फीसदी से ज्यादा उछला, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें गिरने से एयरलाइन की लागत सीधे घटती है। Nifty Pharma इंडेक्स 52 हफ्ते के नए उच्च स्तर पर पहुंचा — Wockhardt 15 फीसदी चढ़ा, Lupin और Laurus Labs नई ऊंचाइयों पर। Nifty Midcap Select इंडेक्स ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई, पिछले एक महीने में 13 फीसदी की बढ़त।
दूसरी तरफ, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने जनवरी से अप्रैल के बीच भारतीय शेयरों में 1.98 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की — सिर्फ चार महीनों में। फिर भी Nifty 50 ने अप्रैल सीरीज में 7.5 फीसदी की बढ़त दर्ज की।
यह बिकवाली कहां गई? और बाजार खड़ा कैसे रहा?
DII 20.9%, FII 17.1% — पहली बार घरेलू संस्थाएं आगे निकलीं
यहीं वह संख्या है जो सब कुछ बदल देती है।
घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी अब 20.9 फीसदी हो गई है — इतिहास में पहली बार। वहीं FII की हिस्सेदारी गिरकर 17.1 फीसदी पर आ गई है। यह पलटाव महज एक तकनीकी आंकड़ा नहीं है। जब से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश खुला, तब से FII हमेशा DII से आगे रहे। आज पहली बार घरेलू संस्थाएं — म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड — विदेशी फंडों से ज्यादा हिस्से की मालिक हैं।
यह हुआ कैसे? दो ताकतें एक साथ काम कर रही थीं।
पहली ताकत: FII की बिकवाली। ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल का भाव 114 डॉलर तक पहुंचा, डॉलर मजबूत हुआ, और विदेशी फंडों ने उभरते बाजारों से पूंजी खींचनी शुरू की। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। FII ने चार महीनों में 1.98 लाख करोड़ की बिकवाली की — जो किसी भी कैलेंडर साल के शुरुआती चार महीनों में सबसे बड़ी रकम है।
दूसरी ताकत: DII की अभूतपूर्व खरीद। म्यूचुअल फंड SIP के जरिए हर महीने 20,000 करोड़ से ज्यादा की पूंजी आ रही है। जब FII बेच रहे थे, तब घरेलू म्यूचुअल फंडों ने उन शेयरों को उठाया। SBI Mutual Fund ने Value और Small-Cap ETF लॉन्च किए। Groww ने Private Bank ETF उतारा। Axis MF ने Nifty Capital Markets Index Fund लाया। यह संयोग नहीं है — यह एक सुनियोजित खरीदारी थी।
नतीजा: जो FII बेच रहे थे, वह DII खरीद रहे थे। बाजार डूबा नहीं।
लेकिन यहां एक पेच है।
DII की खरीदारी SIP पर टिकी है। SIP तब तक चलती रहती है जब तक खुदरा निवेशकों का भरोसा बना रहे। अगर बाजार में बड़ी गिरावट आई — जैसे मार्च में आई थी जब Nifty 12 फीसदी गिरा था — तो क्या खुदरा निवेशक SIP बंद कर देंगे? अगर ऐसा हुआ, तो DII की खरीदारी रुकेगी, और FII की बिकवाली को कोई थामने वाला नहीं होगा।
आगे की राह: DII की नई ताकत या SIP का कमजोर पाया?
यह सवाल अगले कुछ हफ्तों में परखा जाएगा।
एक तरफ, BlackRock के Ben Powell जैसे वैश्विक फंड मैनेजर भारत पर दांव लगा रहे हैं — FII की बिकवाली के बावजूद। उनका तर्क है कि भारत की घरेलू खपत, IT सेवाएं, और फार्मा निर्यात वैश्विक अनिश्चितता में भी मजबूत रहेंगे। Coforge का शेयर 10 फीसदी उछला, क्योंकि Q4 नतीजे मजबूत रहे। SRF 9 फीसदी चढ़ा। Marico रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा। यह बताता है कि कमाई की बुनियाद अभी भी ठोस है।
दूसरी तरफ, जोखिम भी असली हैं। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता अभी सिर्फ उम्मीद है — पक्की नहीं। अगर वार्ता टूटी और क्रूड फिर 114 डॉलर की तरफ गया, तो रुपया दबाव में आएगा। RBI फिलहाल विदेशी बॉन्ड खरीदकर रुपये को थामने की योजना बना रहा है, लेकिन यह अल्पकालिक उपाय है। Nifty को 24,600 के ऊपर टिकना होगा — विश्लेषक Gautam Shah के मुताबिक यही वह स्तर है जो रुझान बदलेगा।
इतिहास में एक समानांतर मिलता है। 2008-09 की मंदी के बाद जब FII निकले, तब LIC और घरेलू फंडों ने बाजार थामा। उस दौर में भी डर था कि खुदरा निवेशक घबरा जाएंगे। लेकिन SIP संस्कृति तब नहीं थी — आज है। यही वह अंतर है जो DII की ताकत को 2009 से अलग बनाता है।
फिर भी, एक बात अनुत्तरित रहती है।
DII की 20.9 फीसदी हिस्सेदारी बाजार को थाम सकती है — लेकिन ऊपर ले जाने के लिए FII को वापस आना होगा। अगर अमेरिका-ईरान शांति समझौता अगले दो हफ्तों में ठोस रूप लेता है और क्रूड 95 डॉलर से नीचे आता है, तो FII की वापसी शुरू हो सकती है — और तब DII और FII दोनों एक साथ खरीदेंगे। लेकिन अगर वार्ता लंबी खिंची और क्रूड ऊंचा रहा, तो DII अकेले कब तक झेलेगा?
कल का एक संकेत देखें: Nifty 24,600 के ऊपर खुलता है या नहीं।