FII 2 लाख करोड़ की बिकवाली|DII रिकॉर्ड खरीद के बाद भी Nifty क्यों गिरा

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आज का बाज़ार: तेल, डॉलर और बिकवाली का तूफ़ान

5 मई 2026 को भारतीय बाज़ार एक बार फिर दबाव में रहे। Nifty 50 करीब 87 अंक गिरकर 24,033 पर बंद हुआ। Sensex 252 अंक की गिरावट के साथ 77,018 पर आ गया। दिन के दौरान Sensex 700 अंक से ज़्यादा टूटा था — बाद में बाज़ार ने कुछ रिकवरी ज़रूर की, लेकिन बंद होने तक नुकसान बना रहा।

इस गिरावट की बड़ी वजह थी Middle East में बढ़ता तनाव। अमेरिका और ईरान के बीच नई झड़प की खबरों से Brent crude $110 के ऊपर टिका रहा। और इसका सीधा असर रुपये पर दिखा — रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर 95.43 प्रति डॉलर तक गिर गया। Standard Chartered ने भारत का FY27 GDP विकास अनुमान 7.1% से घटाकर 6.4% कर दिया, जबकि UBS ने और आगे जाकर 6.2% का अनुमान लगाया। Fitch ने चेतावनी दी कि अगर तेल की ऊंची कीमतें बनी रहीं, तो IOC, BPCL और HPCL जैसी तेल विपणन कंपनियों की साख पर असर पड़ सकता है।

Nifty Realty इंडेक्स आज 1.4% टूटा। ICICI Bank, L&T और Bharti Airtel सबसे ज़्यादा दबाव में रहे। लेकिन एक तस्वीर दूसरी भी थी — M&M 2% चढ़ा, जब कंपनी ने Q4 में मुनाफ़ा 53% उछलने की खबर दी। Coforge और Tata Technologies भी हरे निशान में बंद हुए।

तो बाज़ार गिरा — यह समझ में आता है। लेकिन सवाल यह है कि यह इतना कम क्यों गिरा? ₹2 लाख करोड़ से ज़्यादा की विदेशी बिकवाली के बाद भी Nifty 24,000 के ऊपर कैसे टिका है?

जब विदेशी भागे, तो घरेलू निवेशकों ने खरीद ली कमान

Motilal Oswal की ताज़ा रिपोर्ट एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने रखती है। मार्च 2026 तक DII — यानी घरेलू संस्थागत निवेशक — Nifty 50 में 25.4% के मालिक बन चुके हैं। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। दूसरी तरफ, FII का हिस्सा घटकर 22.2% रह गया — जो कई सालों का न्यूनतम है।

यह पहली बार हुआ है जब घरेलू संस्थाएं विदेशी निवेशकों से ज़्यादा Nifty की मालिक हैं। Nifty 500 में तो FII का स्वामित्व एक दशक के निचले स्तर 17.1% पर आ गया है, जबकि DII 20.9% के रिकॉर्ड पर हैं।

इसके पीछे की कहानी SIP की है। हर महीने करीब ₹25,000 करोड़ mutual fund SIP के ज़रिए बाज़ार में आ रहे हैं — चाहे बाज़ार ऊपर हो या नीचे। FII ने 2026 के पहले चार महीनों में ₹2 लाख करोड़ से अधिक बेचे, लेकिन DII ने ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा खरीदे। अकेले मार्च में FII ने ₹1.2 लाख करोड़ की बिकवाली की, और DII ने उसी महीने ₹1.42 लाख करोड़ डाले।

FII और DII के स्वामित्व का अनुपात अब 0.8x पर आ गया है — 2016 में यह 1.7x था। इस अनुपात का मतलब है कि भारतीय बाज़ार अब विदेशी पूंजी के भरोसे नहीं रहा। घरेलू पैसा ही बाज़ार का नया आधार बन गया है।

लेकिन यहीं पर एक पेंच है। MSCI Emerging Markets में भारत का वज़न सितंबर 2024 के 21% से घटकर मई 2026 में 12% पर आ गया है — यह लगभग COVID के स्तर पर है। Taiwan 25%, China और South Korea 19%-19% पर आगे हैं। जैसे-जैसे MSCI में भारत का वज़न घटता है, passive fund managers को mechanically और बेचना पड़ता है। और SIP की मज़बूती का असली इम्तिहान तब होगा, जब यह दबाव और तेज़ हो।

आगे क्या: SIP की ताकत कब तक काफी है

2020 में जब COVID ने बाज़ार को तोड़ा, DII ने तब भी खरीदारी जारी रखी। उस वक्त Nifty मार्च में 38% गिरा, लेकिन अगले 12 महीनों में 100% से ज़्यादा चढ़ा। घरेलू पैसे की ताकत ने तब भी बाज़ार को संभाला। लेकिन 2020 में FII ने वापसी काफी जल्दी की — तेल का झटका नहीं था, supply chain टूटा नहीं था।

आज की स्थिति अलग है। Standard Chartered की अनुभवी विश्लेषक अनुभूति सहाय के मुताबिक, high-frequency indicators — नए project announcements, cargo arrivals, cooking gas की खपत — सब कमज़ोर पड़ रहे हैं। अगर crude का औसत $90 प्रति बैरल रहा, तो GDP 6.4% पर सिकुड़ सकता है। UBS ने $100 के आधार पर 6.2% का अनुमान लगाया है।

अगर FII की वापसी का रास्ता साफ हो — तेल $90 के नीचे आए, MSCI में India का वज़न स्थिर हो — तो DII की ज़बरदस्त खरीद एक तेज़ rally का trigger बन सकती है। Motilal Oswal ने खुद कहा: "Even a pause in foreign selling could act as a catalyst for sharper market rallies."

लेकिन अगर तेल $110 के ऊपर बना रहा और MSCI में भारत की हिस्सेदारी 12% से और नीचे खिसकी, तो SIP की ₹25,000 करोड़ मासिक खरीद भी कम पड़ सकती है। वह तब होगा जब खुदरा निवेशकों में घबराहट आए — और SIP रद्द होने शुरू हों। अभी retail ownership 5-year low पर है, यानी खुदरा निवेशक पहले ही बाज़ार से दूरी बना चुके हैं। अगर MF holders भी डरे, तो DII की ढाल कमज़ोर होगी।

कल की कसौटी यह है: क्या MSCI India का वज़न अगली quarterly rebalancing में और गिरता है? और क्या SIP inflow मई में ₹25,000 करोड़ के स्तर पर टिका रहता है — या नीचे आता है? जब तक SIP का प्रवाह मज़बूत है, Nifty के लिए 23,500–23,800 एक ठोस support zone है। लेकिन अगर MSCI का pressure बढ़ा और SIP घटा, तो वह zone भी परखा जाएगा।

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