HDFC Bank|1 लाख जुर्माना, पर सवाल बाकी

· NIFTY

बोर्ड का फैसला

HDFC Bank के बोर्ड ने 23 जुलाई की बैठक में MSRDC डिपॉजिट मामले की आंतरिक समीक्षा पूरी की। नतीजा 27 जुलाई को सामने आया। प्रबंध निदेशक व सीईओ शशिधर जगदीशन, सीएफओ श्रीनिवासन वैद्यनाथन, और रिटेल एसेट्स प्रमुख अरविंद वोहरा — तीनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

बोर्ड की विशेष अनुशासन समिति ने पाया कि कर्मचारियों का आचरण दुर्भावनापूर्ण, निजी लाभ या गलत मंशा से प्रेरित नहीं था। इसे केवल बिजनेस ओवररीच बताया गया। यह मामला 2017 और 2021 में MSRDC से डिपॉजिट जुटाने की व्यवस्था से जुड़ा है।

यहीं पहला अंतर्विरोध है। बोर्ड ने अपने ही बयान में कहा कि RBI के निर्देशों से संभावित विचलन हो सकता है। इसी वजह से जुर्माना और चेतावनी पत्र दिए गए, और मामले को औपचारिक रूप से रिज़र्व बैंक को सूचित करने का निर्देश दिया गया। एक मामूली सज़ा, पर एक गंभीर स्वीकारोक्ति साथ-साथ आई।

बाज़ार की प्रतिक्रिया और असली अंतर्विरोध

जुर्माना भले ही छोटा हो, बाजार की प्रतिक्रिया छोटी नहीं रही। स्टॉक 17 जुलाई के 808.30 रुपये से गिरकर 23 जुलाई तक 747.25 रुपये पर आ गया, यानी एक हफ्ते में साढ़े सात फीसदी से ज्यादा की गिरावट। साल की शुरुआत से अब तक शेयर करीब सवा पच्चीस फीसदी नीचे है।

यही असली विरोधाभास है। बोर्ड कहता है कि किसी ने गलत मंशा से काम नहीं किया, फिर भी निवेशक इस हल्की सज़ा को गवर्नेंस की कमजोरी के संकेत की तरह पढ़ रहे हैं। एक लाख रुपये का जुर्माना कंपनी के लिए नगण्य है, पर यह जो सवाल छोड़ता है वह नगण्य नहीं।

यहां जवाब थोड़ा और साफ होता है। बोर्ड की कार्रवाई केवल आंतरिक अनुशासन का मामला है। यह एक सीमित, घरेलू निष्कर्ष है — पूरे मसले का अंत नहीं। असली अनिश्चितता कहीं और चल रही है, बॉर्डर के उस पार।

अमेरिका में समांतर जांच

इसी हफ्ते तीन अमेरिकी शेयरधारक लॉ फर्मों ने HDFC Bank के खिलाफ अलग-अलग जांच शुरू की। ग्लांसी प्रोंगे वुल्क एंड रॉटर, फ्रैंक आर क्रूज़ के कानूनी दफ्तर, और हावर्ड जी स्मिथ के कानूनी दफ्तर। ये फर्में देख रही हैं कि क्या बैंक ने अमेरिकी सिक्योरिटीज़ कानूनों का उल्लंघन किया। यह जांच मई की उस रिपोर्ट से जुड़ी है जिसमें दावा किया गया था कि करीब पैंतालीस करोड़ रुपये को मार्केटिंग खर्च दिखाकर MSRDC को ज्यादा ब्याज दिया गया।

मई में जब यह रिपोर्ट सामने आई थी, न्यूयॉर्क में लिस्टेड बैंक के एडीआर चार दशमलव एक फीसदी गिरे थे। कानूनी विशेषज्ञ एचपी रानीना के मुताबिक, यह अभी शुरुआती तथ्य-खोज है, कोई मुकदमा दाखिल नहीं हुआ। लेकिन बैंक ने साफ कहा कि इन आरोपों को खारिज करता है और अपनी आंतरिक निगरानी प्रणाली को मजबूत बताया।

तो अब जवाब और स्पष्ट होता है। घरेलू बोर्ड-कार्रवाई और अमेरिकी कानूनी जांच — दोनों एक ही मूल घटना से निकले हैं, पर स्वतंत्र रूप से चल रहे हैं। एक बंद हो गया है, दूसरा अभी बहुत शुरुआती चरण में है। दोनों को एक मान लेना भूल होगी।

आगे क्या देखना है

इस पूरे घटनाक्रम में एक स्थिरता कारक भी मौजूद है। रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा पहले ही कह चुके हैं कि केंद्रीय बैंक की समीक्षा में बैंक की गवर्नेंस को लेकर कोई ठोस चिंता नहीं मिली। यह टिप्पणी अप्रैल की मौद्रिक नीति बैठक में आई थी, इस ताज़ा बोर्ड-निर्णय से पहले।

अंतिम और सबसे व्यावहारिक चौकी भविष्य में है। जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर में खत्म होता है, और बोर्ड ने अभी तक उनकी पुनर्नियुक्ति की सिफारिश आरबीआई को नहीं भेजी है। स्वतंत्र निदेशकों की अतिरिक्त समीक्षा के नतीजे अगस्त की शुरुआत में आने की उम्मीद है। जब तक अमेरिकी जांच आगे नहीं बढ़ती और यह पुनर्नियुक्ति तय नहीं होती, तब तक धारकों के लिए सही पढ़ाई यही है — घरेलू अध्याय बंद हुआ है, पर पूरी अनिश्चितता नहीं।

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