HFCL रिकॉर्ड मुनाफा, 268% रैली|103 गुना कमाई पर टिका दांव

· NIFTY

रिकॉर्ड मुनाफा, मगर सवाल कायम

HFCL ने जून तिमाही में 228.6 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को घाटा हुआ था। यह शेयर जनवरी 2026 के 52-हफ्ते के निचले स्तर से अब तक 268 प्रतिशत ऊपर जा चुका है। सवाल यह नहीं कि नतीजे अच्छे हैं या नहीं, सवाल यह है कि बाजार पहले ही इतना आगे बढ़ चुका है कि अगला कदम कहां से आएगा।

तिमाही रेवेन्यू 120 प्रतिशत बढ़कर 1,915 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, और एबिटा मार्जिन 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 21.6 प्रतिशत हो गया। कंपनी का ऑर्डर बुक अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 26,665 करोड़ रुपये पर है, जो वित्त वर्ष 26 के पूरे रेवेन्यू का करीब पांच गुना है। यह सिर्फ एक अच्छी तिमाही नहीं बल्कि व्यवसाय के ढांचे में बदलाव की तस्वीर पेश करता है।

बदलाव असली है, लेकिन दाम पहले ही चुक चुका

यह टर्नअराउंड अचानक नहीं आया। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने खुद को सरकारी EPC ठेकेदार से हटाकर ऑप्टिकल फाइबर, डिफेंस कम्युनिकेशन और डेटा सेंटर कनेक्टिविटी जैसे हाई-मार्जिन प्रोडक्ट कारोबार की ओर मोड़ा है। निर्यात अब कुल रेवेन्यू का 55.5 प्रतिशत है, जो एक साल पहले सिर्फ 24.1 प्रतिशत था। एक सेना संचार परियोजना की वारंटी अवधि खत्म होने से जो लागत का बोझ कंपनी झेल रही थी, वह अब घटने लगा है।

लेकिन यहीं वह धारणा है जिसे बाजार बिना जांचे मान बैठा है — कि मुनाफे में सुधार अपने आप ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा देगा। हकीकत में स्टॉक अपनी तीन-साल की औसत कीमत-आय अनुपात से दोगुने से भी ज्यादा, यानी करीब 103 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि टेलीकॉम इक्विपमेंट इंडस्ट्री का औसत महज 15 गुना है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी अभी भी सिर्फ सात प्रतिशत के आसपास है — यानी जितना मुनाफा दिखता है, कंपनी की पूंजी उतनी कुशलता से अभी काम नहीं कर रही।

नकदी का सवाल, और अगला पड़ाव

कागज़ पर मुनाफा तो बढ़ रहा है, मगर वित्त वर्ष 26 में कंपनी का ऑपरेटिंग और फ्री कैश फ्लो अब भी नेगेटिव रहा। यह वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और चल रहे कैपेक्स के दबाव को दिखाता है। एक व्यवसाय जो कागज़ पर मुनाफे में है लेकिन लगातार नकदी गंवा रहा है, उसकी कमाई की गुणवत्ता अभी साबित होनी बाकी है — यह वह दरार है जिसे रिकॉर्ड नतीजों की सुर्खियां छिपा देती हैं।

सेना का वार्षिक रखरखाव ठेका वित्त वर्ष 27 में शुरू होने की उम्मीद है, जो अब तक की लागत को नियमित राजस्व में बदल सकता है, और करीब 10,159 करोड़ रुपये का वैश्विक ऑप्टिकल फाइबर आपूर्ति ठेका भी इसी साल क्रियान्वयन में आना है। इनमें से किसी में देरी, ऊंचे वैल्यूएशन पर बैठे इस स्टॉक के लिए तुरंत झटका बन सकती है।

जो निवेशक पहले से यह स्टॉक होल्ड कर रहे हैं, उनके लिए अगली तिमाही का ऑपरेटिंग कैश फ्लो निर्णायक संकेत है — अगर नकदी प्रवाह सकारात्मक मुड़ता है, तो यह मुनाफे की मजबूती की पुष्टि है; अगर यह नेगेटिव बना रहता है, तो ऊंचा वैल्यूएशन जोखिम में बदल सकता है। जो लोग अभी बाहर हैं और एंट्री सोच रहे हैं, उनके लिए सेना के AMC ठेके की वास्तविक शुरुआत ही वह पुष्टि है जो तय करेगी कि यह टर्नअराउंड टिकाऊ है या सिर्फ बाजार का उत्साह।

Link copied