HPCL-BPCL-IOC 3 रुपये की राहत|500 करोड़दिन घाटा अभी भी जारी?

· NIFTY

बाज़ार का उल्टा जवाब

15 मई को सरकार ने चार साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाईं, और उसी दिन HPCL, BPCL, IOC के शेयर 3 से 7 प्रतिशत तक गिर गए।

यह गिरावट इसलिए नहीं आई कि बढ़ोतरी बुरी खबर थी — बल्कि इसलिए आई कि बाज़ार ने उस बढ़ोतरी की संख्या को देखा और समझा कि यह घाटे की दिशा नहीं बदलती।

अप्रैल में OMC का संयुक्त दैनिक घाटा 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये था। 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद ICRA का अनुमान है कि यह घाटा अभी भी 500 करोड़ प्रति दिन बना हुआ है।

यानी बढ़ोतरी ने घाटे को तीन-चौथाई कम किया — लेकिन शून्य नहीं किया। और बाज़ार ने यही अंतर पकड़ा।

जब कोई कंपनी हर दिन घाटे में हो, तो उसके शेयर की valuation उस भविष्य की कमाई पर टिकी होती है जब घाटा बंद होगा। अगर वह क्षण अनिश्चित रहे, तो capital वहाँ नहीं रुकती।

यहाँ असली सवाल यह है कि 3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद भी 500 करोड़/दिन का घाटा क्यों बचा — और उसकी जड़ कहाँ है।

घाटे की असली गहराई

28 फरवरी को जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया, तब Brent crude 72 डॉलर प्रति बैरल पर था। उसके बाद ईरान ने होर्मुज़ जलसंधि बंद की और Brent 144 डॉलर तक पहुँच गया — यानी input cost में 50 प्रतिशत से अधिक का उछाल।

OMC ने उस पूरे दबाव में retail price नहीं बढ़ाई, क्योंकि सरकार की प्राथमिकता consumer shielding थी — वही नीति जो स्पेन में 34 प्रतिशत, जापान में 30 प्रतिशत की price बढ़ोतरी के बीच भारत ने नहीं चुनी।

नतीजा: मार्च के मध्य से 10 हफ्तों में कुल under-recovery 1 लाख करोड़ रुपये से पार हो गई। अप्रैल में अकेले पेट्रोल पर 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर का घाटा था।

यहाँ एक counter-signal है जिसे बाज़ार ने शायद पूरी तरह weigh नहीं किया: HPCL का Q4 FY26 मुनाफा 46 प्रतिशत उछलकर 4,902 करोड़ रुपये रहा — लेकिन यह तब था जब under-recovery का पूरा बोझ अभी balance sheet पर नहीं आया था।

जब वह बोझ Q1 FY27 की संख्याओं में दिखेगा, तब valuations को फिर से calibrate करना होगा।

सरकार ने excise duty में कटौती से 14,000 करोड़ रुपये प्रति माह का राजस्व छोड़ा — यानी fiscal space पहले ही संकुचित हो चुकी है, और अगली बढ़ोतरी का बोझ पूरी तरह OMC या consumer पर ही पड़ेगा।

लेकिन जिस बात पर capital का movement निर्भर है, वह यह नहीं है कि पिछला घाटा कितना था — बल्कि यह है कि अगली बढ़ोतरी कब और कितनी होगी, और उसकी शर्त क्या है।

अगली बढ़ोतरी की शर्त

ICRA के अनुसार OMC को pre-war level पर लाने के लिए कीमतें और 16 प्रतिशत बढ़ानी होंगी — यानी 3 रुपये केवल पहला कदम था, और मंज़िल अभी दूर है।

पूर्व HPCL CMD MK Surana का तर्क यह है कि अगर बड़ी बढ़ोतरी नहीं की गई, तो under-recovery का pool हर दिन बढ़ता रहेगा — और delayed hike का मतलब होगा और बड़ा एकमुश्त झटका।

यहाँ वह convergence point है जहाँ capital flow का फैसला होगा: Brent crude का स्तर, सरकार की अगली बढ़ोतरी की timing, और upstream companies — ONGC जैसी — पर burden-sharing का दबाव।

Surana ने यह भी कहा कि upstream और downstream का एक साथ लाभ-हानि असंभव है — यानी अगर crude high रहा, तो upstream की कमाई बढ़ेगी और उन्हें कुछ बोझ उठाना पड़ सकता है, जैसा 2022 में हुआ था।

अगर Brent 105 डॉलर से नीचे आता है और सरकार एक और हाइक देती है, तो OMC की under-recovery शून्य की ओर जा सकती है — और तब वही capital जो अभी निकली है, वापस आ सकती है।

लेकिन अगर होर्मुज़ का संकट 75 दिन से आगे खिंचा और crude 105 के ऊपर रहा, तो 3 रुपये की बढ़ोतरी एक और "moving target" बनकर रह जाएगी — और 500 करोड़/दिन का वह आंकड़ा, जो 15 मई को बाज़ार ने पढ़ा था, शेयर की अगली दिशा का असली benchmark साबित होगा।

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