Iran Oil Shock Hits Rupee|Indias forex under what pressure?

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रुपया और कच्चा तेल

रुपया मंगलवार को 94.90 प्रति डॉलर तक गिर गया — लेकिन जो बात सुर्खियों में नहीं आई वह यह है कि यह गिरावट सिर्फ डॉलर की मजबूती से नहीं, बल्कि ब्रेंट क्रूड के 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से हुई। पिछले तीन दिनों में रुपया कुल 139 पैसे टूटा है, और इसका सीधा कारण है कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85% आयात करता है — यानी हर बार जब तेल महंगा होता है, भारत को डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला तेल प्रवाह खतरे में है, और अगर यह रास्ता बंद हुआ तो भारत को वैकल्पिक मार्गों से तेल लेना होगा जो और महंगा पड़ेगा। आईईए ने चेतावनी दी है कि 2026 में आपूर्ति मांग से कम रह सकती है — यह कोई अनुमान नहीं, बल्कि उस वास्तविकता की स्वीकृति है जो पहले से बाजार में दिख रही है। अर्थशास्त्री Duvvuri Subbarao ने कहा कि अगर रुपया 100 के करीब पहुंचा, तो RBI को ब्याज दर बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है — जो अभी तक की धारणा से बिल्कुल उलट होगा। ANZ रिसर्च का अनुमान है कि रुपया साल के अंत तक 97.5 तक जा सकता है, लेकिन RBI इसे 100 नहीं जाने देगा। यह गिरावट कहां रुकेगी यह तेल की कीमतों पर निर्भर करता है — और तेल की कीमतें अभी ईरान वार्ता पर टिकी हैं जो अनिश्चित है।

सोना और आयात नीति

जिस दिन रुपया टूट रहा था, उसी दिन सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया — यह फैसला कोई संयोग नहीं था। सरकार का तर्क सीधा है: जब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव हो, तो सोने का आयात कम करना जरूरी है क्योंकि भारत सोने पर सालाना अरबों डॉलर खर्च करता है जो डॉलर के बाहर जाने का बड़ा कारण बनता है। PM Modi ने नागरिकों से अपील की कि एक साल के लिए गैर-जरूरी सोना खरीदना टाल दें — यह अपील अभूतपूर्व है। Titan, Kalyan Jewellers और Senco Gold के शेयर दो दिनों में 11–15% तक गिरे, और 50,000 करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण स्वाहा हो गया। लेकिन यहां एक उलटा पहलू है: आयात शुल्क बढ़ने से दुबई जैसे रास्तों से सोने की तस्करी बढ़ सकती है — Jefferies ने यही चेतावनी दी है। इसका मतलब है कि शुल्क बढ़ाने का फायदा आंशिक ही रहेगा, और बड़े जौहरी जो वैध आयात करते थे, वे सबसे ज्यादा नुकसान में होंगे। GTRI ने कहा कि दुबई से सोने का आयात बढ़ सकता है, जो असंगठित बाजार को फायदा देगा। तो ड्यूटी हाइक ने जो समस्या हल करने की कोशिश की, उसका एक हिस्सा और गहरा हो सकता है — और यही असमंजस बाजार को अगले कदम की तलाश में रखता है।

बाजार और Q4 नतीजे

रुपये की कमजोरी और सोने की नीति के बीच बाजार ने Q4 नतीजों को भी पचाने की कोशिश की — लेकिन दोनों एक ही दिशा में नहीं गए। Sensex मंगलवार को 1,456 अंक टूटा और Nifty 23,400 के नीचे बंद हुआ, जो दो महीने का निचला स्तर है। SBI के शेयर दो दिनों में 10% गिरे क्योंकि Q4 में NIM यानी नेट इंटरेस्ट मार्जिन अनुमान से कम रहा — यह संकेत है कि महंगे कर्ज के दौर में बैंकों की कमाई पर दबाव बढ़ रहा है। Tata Power के शेयर 5–7% गिरे क्योंकि थर्मल रेवेन्यू कमजोर रहा, हालांकि पूरे साल का मुनाफा रिकॉर्ड ऊंचाई पर था — यह बताता है कि बाजार तत्काल तिमाही परिणाम देखता है, दीर्घकालिक रिकॉर्ड नहीं। Nuvama ने Tata Power को डाउनग्रेड किया, लेकिन Goldman Sachs पहले से Sell रेटिंग दे रहा था। अगर तेल की कीमतें ऊंची रहीं तो ईंधन महंगाई बढ़ेगी, RBI को दर में कटौती रोकनी होगी, और बैंकिंग शेयरों पर दबाव जारी रहेगा। लेकिन अगर ईरान वार्ता सफल हुई — जिसका Trump ने संकेत दिया है — तो तेल 90 डॉलर तक आ सकता है और यह पूरी तस्वीर पलट सकती है। कल Nifty के लिए 23,262 का स्तर अहम है: अगर यह टूटा तो तकनीकी आधार पर 22,500 अगला पड़ाव होगा, और अगर यह बचा रहा तो June तक 26,000 का अनुमान भी मेज पर है। वह 94.90 का रुपया स्तर — जो आज का रिकॉर्ड निचला स्तर रहा — कल का सबसे अहम संकेतक होगा।

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