MTF Book 1.23 लाख Cr रिकॉर्ड|Nifty 23,900 पर गिरा घरेलू निवेशक डर में खरीद क्यों रहे हैं?

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आज का बाजार: एक दिन में दो अलग कहानियाँ

26 मई 2026 को Sensex 479 अंक गिरकर बंद हुआ और Nifty 23,950 के नीचे चला गया। Brent Crude $100 प्रति बैरल की तरफ बढ़ रहा था। अमेरिका के ईरान पर हमलों की खबर ने West Asia में तनाव फिर से भड़का दिया, जिससे Apollo Hospital, Titan और Kotak Bank जैसे बड़े नाम शीर्ष losers में रहे। Rupee 95.73 पर आ गया। FPI लगातार बिकवाली कर रहे हैं — earnings की चिंता, currency depreciation और global bond yields तीनों एक साथ दबाव बना रहे हैं। ऊपर से Brent Crude का बढ़ना inflation की चिंता को और गहरा कर रहा है। Bank Nifty 55,400 तक लुढ़क गया। लेकिन इसी दिन, midcap और smallcap indices ने gains दर्ज किए — Nifty के largecap दर्द से बिल्कुल अलग एक कहानी सामने आई। Vodafone Idea, Suzlon Energy और JP Power जैसे stocks NSE पर सबसे ज़्यादा traded रहे, जो बताता है कि volume कहाँ जा रहा था। MTF book का ताज़ा आँकड़ा इसी पृष्ठभूमि में देखना ज़रूरी है।

₹1.23 लाख करोड़ का संकेत: जब गिरावट में भी उधार लेकर खरीदारी होती है

NSE के आँकड़ों के मुताबिक, Margin Trading Facility Book — यानी वह राशि जो निवेशकों ने उधार लेकर शेयर खरीदने में लगाई है — 22 मई 2026 तक ₹1.23 लाख करोड़ पर पहुँच गई। मार्च 2026 के अंत में यही आँकड़ा ₹1.05 लाख करोड़ था। यानी सिर्फ आठ हफ्तों में 17% की बढ़त। यह तब हो रहा है जब Nifty उसी अवधि में दबाव में है, FPI बेच रहे हैं, और geopolitical tensions बढ़ रहे हैं। इस MTF book में HDFC Bank, Jio Financial Services, Infosys, SBI, Reliance Industries, Bharat Electronics और CDSL जैसे नाम सबसे ऊपर हैं — यह wholesale panic की तस्वीर नहीं है, यह selective और calculated accumulation का pattern है। जो निवेशक डरे होते हैं वे margin call से बचने के लिए पोजीशन काटते हैं, leverage घटाते हैं। यहाँ उल्टा हो रहा है — leverage बढ़ रहा है। इसका mechanism समझना ज़रूरी है। जब बाजार गिरता है और valuations attractive लगने लगते हैं, तो एक खास तरह का निवेशक — जिसके पास conviction है — margin लेकर उस गिरावट को अवसर की तरह देखता है। Rohit Srivastava जैसे analysts जब Nifty का target 25,800 बताते हैं और Bank Nifty में technical breakout देखते हैं, तो यह MTF surge उस thesis का एक market-level echo है। Mayuresh Joshi healthcare, engineering और specialty chemicals में resilience देख रहे हैं — और MTF book के top names में भी यही broader pattern दिखता है। लेकिन यहाँ दूसरा पहलू भी है: अगर बाजार और गिरा, तो ₹1.23 लाख करोड़ की leveraged positions forced selling का trigger बन सकती हैं — जो गिरावट को और गहरा करती है।

आगे की राह: दो परिदृश्य और एक निर्णायक संख्या

2020 के March crash के बाद भी MTF book में इसी तरह की तेज बढ़त देखी गई थी — उस वक्त भी FPI बेच रहे थे और domestic investors leverage लेकर खरीद रहे थे। उसके बाद Nifty ने 18 महीनों में अपने low से 130% की वापसी की। लेकिन 2008 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था — leveraged positions ने rebound की बजाय avalanche बनाई। फर्क तब था जब fundamentals टूट गए थे। आज का फर्क यह है कि healthcare, capital goods और specialty chemicals की earnings trajectory intact है, और RBI के पास dollar inflows बढ़ाने के उपाय तलाशने की गुंजाइश है। पहला परिदृश्य: अगर Brent Crude $100 के ऊपर स्थिर हो जाता है और US-Iran तनाव लंबा खिंचता है, तो Rupee और कमज़ोर होगा, inflation बढ़ेगी, और यह leveraged book एक pressure point बन सकती है। दूसरा परिदृश्य: अगर geopolitical tension थमता है, crude नरम होता है, और FPI की बिकवाली की रफ्तार घटती है, तो ₹1.23 लाख करोड़ की यह खरीदारी एक self-fulfilling bottom बना सकती है — जैसा 2020 में हुआ। निर्णायक benchmark यह है: अगर Nifty 23,700 के support को hold करता है और MTF book ₹1.30 लाख करोड़ से नीचे रहती है, तो यह accumulation phase माना जा सकता है। अगर Nifty इस level को तोड़ता है, तो वही leverage जो आज buying का signal दे रहा है, कल selling की वजह बन सकता है। सवाल यह नहीं है कि बाजार ऊपर जाएगा या नहीं — सवाल यह है कि ₹1.23 लाख करोड़ का यह दांव किसका सही निकलेगा: उन घरेलू निवेशकों का जिन्होंने गिरावट में खरीदा, या उन FPIs का जो बेचकर निकल रहे हैं।

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