Muthoot Finance 135% मुनाफ़ा, Stock -8%|घटते ग्राहक कहाँ जा रहे हैं?

· NIFTY

आज का बाज़ार: Nifty दबाव में, Adani उछला

15 मई 2026 को Nifty50 26,000 के करीब खुला, लेकिन कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के पार होने से बाज़ार पर दबाव बना रहा। VIX 19.43 पर था — यानी निवेशकों में बेचैनी बरकरार थी। रुपया एक बार फिर 96 के पार गया और नए रिकॉर्ड निचले स्तर को छूकर 95.86 पर बंद हुआ, जो पिछले 12 महीनों में 11 प्रतिशत की गिरावट है।

इसी बीच Adani Group के शेयरों में अलग ही हलचल थी। अमेरिकी SEC के साथ 1.8 करोड़ डॉलर के सिविल समझौते और DOJ के आपराधिक मुकदमा वापस लेने की खबर के बाद Adani Enterprises 3.5 प्रतिशत उछलकर 52-हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुँच गया। Adani Ports और Adani Green भी इसी रफ्तार पर चले। लेकिन यह तेजी संकुचित थी — बाकी बाज़ार तेल और मुद्रा के दबाव में दबा रहा।

April 2026 का व्यापार घाटा 28.4 अरब डॉलर तक चौड़ा हो गया, भले ही निर्यात 43.6 अरब डॉलर तक पहुँचकर 13.8 प्रतिशत बढ़े। तेल और सोने के आयात में उछाल ने सारी बढ़त निगल ली। Flipkart का IPO Walmart के आदेश पर टल गया — FY27 तक EBITDA ब्रेकइवन पहले, बाज़ार में लिस्टिंग बाद। इन सब खबरों के बीच एक नंबर सबसे अलग था।

135% मुनाफ़ा, -8% शेयर: Muthoot का विरोधाभास

Muthoot Finance ने Q4 FY26 में ₹3,397 करोड़ का शुद्ध मुनाफ़ा दर्ज किया — एक साल पहले से 135 प्रतिशत ज़्यादा। पूरे FY26 में कंपनी का consolidated PAT ₹10,607 करोड़ रहा, जो 98 प्रतिशत सालाना वृद्धि है। Loan AUM 49 प्रतिशत बढ़कर ₹1,81,916 करोड़ तक पहुँचा।

फिर भी शेयर 8 प्रतिशत गिरा।

वजह एक ही थी: active ग्राहकों की संख्या में तिमाही आधार पर गिरावट। मुनाफ़ा बढ़ा, लेकिन कंपनी से कर्ज लेने वाले लोगों की तादाद घटी। इसका मतलब यह है कि Muthoot का AUM growth उन कम ग्राहकों से आ रही है जो बड़े कर्ज़ ले रहे हैं — यानी औसत टिकट साइज़ बड़ा हुआ है। यह अच्छा लग सकता है, लेकिन असल सवाल यह है: वे छोटे ग्राहक जो चले गए, वे कहाँ गए?

सोने पर कर्ज़ के बाज़ार में नए खिलाड़ी आए हैं — बैंक अब gold loan पर आक्रामक हैं। SBI, HDFC Bank और Kotak ने पिछले साल gold loan पोर्टफोलियो बढ़ाया। जब बैंक के पास ब्याज दर कम हो और Muthoot की ब्याज दर ज़्यादा, तो छोटे कर्ज़दार बैंकों की ओर शिफ्ट होते हैं। Muthoot के पास बड़े ticket size वाले ग्राहक बचते हैं जो शायद बैंक eligibility नहीं रखते।

यहाँ तनाव यह है: Stage III loan assets — यानी NPA — Muthoot Homefin में 1.17 प्रतिशत से बढ़कर 2.63 प्रतिशत हो गए। Jefferies ने target price ₹4,750 से घटाकर ₹4,350 किया। AUM बढ़ रहा है, लेकिन क्या यह वही ग्राहक हैं जो सबसे ज़्यादा जोखिम वाले हैं?

आगे का रास्ता: बड़े ticket का दांव कब तक चलेगा?

Muthoot का मॉडल अभी एक नाज़ुक संतुलन पर है। वह सवाल जो Q4 नतीजों ने अनसुलझा छोड़ा — घटता ग्राहक आधार — वही अगले दो तिमाहियों में कंपनी की दिशा तय करेगा।

अगर यह रुझान जारी रहा तो इसका मतलब है कि Muthoot का बाज़ार हिस्सेदारी में नुकसान सिर्फ volume में नहीं, बल्कि demographic में भी है। छोटे कर्ज़दार — जो पारंपरिक रूप से gold loan कंपनियों की नींव हैं — बैंकों की ओर जा रहे हैं। 2018 में जब IL&FS संकट आया था, तब NBFCs से capital flight हुआ था और gold loan कंपनियों ने उससे फायदा उठाया था — क्योंकि तब उनके पास secured collateral था। आज स्थिति उलट है: बैंकों के पास capital है और वे खुद gold loan में उतर आए हैं।

यहाँ continuation की शर्त यह है: अगर सोने की कीमत ₹95,000 प्रति 10 ग्राम के ऊपर बनी रहे तो Muthoot का AUM high ticket size पर टिका रहेगा, क्योंकि collateral value ऊँची रहेगी। लेकिन अगर सोना ₹85,000 से नीचे आया — जैसा कि सरकार के import duty hike का दबाव दे सकता है — तो collateral shrinkage से बड़े ticket ग्राहकों का loan-to-value ratio बिगड़ेगा।

breakdown की शर्त इससे भी सीधी है: अगर Q1 FY27 में active customer base तीसरी तिमाही लगातार गिरे तो बाज़ार इसे market share loss के रूप में price करेगा, न कि portfolio mix improvement के रूप में। ₹4,350 का Jefferies target तब conservative नहीं, बल्कि optimistic लग सकता है।

Muthoot का नतीजा बता रहा है कि gold loan का बाज़ार बड़ा हो रहा है — लेकिन Muthoot उसमें छोटा होता जा रहा है। कंपनी की जाँच का पैमाना अगले तिमाही की balance sheet नहीं, बल्कि active borrower count है: अगर वह फिर गिरा, तो 135 प्रतिशत का मुनाफ़ा growth story नहीं बनेगा — warning signal बनेगा।

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