Nifty IT 4% Rally|2008 Valuations के बाद अगला कदम कहाँ?

· NIFTY

जब रुपया गिर रहा था, IT इंडेक्स उड़ रहा था

जिस दिन रुपया 96.52 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा, उस दिन Nifty IT इंडेक्स 4% से ज़्यादा चढ़ गया। यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है — तीन सत्रों में Nifty IT 8% ऊपर जा चुका है, और Infosys, TCS, Tech Mahindra जैसे दिग्गज 5-6% तक उछले। बाज़ार का यही हिस्सा था जो पिछले कुछ महीनों से सबसे ज़्यादा दबाव में था।

Sensex आज 364 अंक ऊपर खुला और 75,709 पर बंद हुआ। Nifty 50, 23,618 पर बंद हुआ — दिन के उतार-चढ़ाव के बाद मामूली गिरावट में। लेकिन उसी सत्र में रुपया 96.38-96.52 के बीच झूलता रहा। Middle East में तनाव, ईरान-अमेरिका युद्ध की छाया, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें — ये सब Broad Market को दबा रहे थे। मिड और स्मॉलकैप ने Nifty 50 को outperform किया, और IT ने पूरे बाज़ार को नेतृत्व दिया।

Dollar की मज़बूती ने IT की earnings को rupee terms में बेहतर बना दिया — यह तर्क है। Cognizant ने अपना share buyback target $2 billion तक बढ़ाया। Infosys पर Goldman Sachs ने neutral रखा, Citi ने Paytm पर buy बरकरार रखा। लेकिन यह तर्क पूरा नहीं है। Infosys ने Q4 bonus payouts काटे। TCS के CFO ने AI से revenue के खतरे की चेतावनी दी। और फिर भी IT stocks एक साथ 5-6% ऊपर गए — किसी एक company के नतीजे से नहीं, बल्कि पूरे sector ने एक साथ capital खींचा।

2008 वाले Valuations पर IT की यह तेज़ी किसकी है?

The Economic Times ने लिखा कि IT stocks की valuations अब 2008 के स्तरों के करीब हैं। यह एक counter-signal है जिसे ज़्यादातर investors ने नज़रअंदाज़ किया। 2008 में जब IT valuations इस level पर थे, तब global financial crisis के बाद sector ने years तक underperform किया था। आज का context अलग है — लेकिन यह तथ्य कि valuations उस स्तर पर लौट आए हैं, capital flows की एक अलग कहानी बताता है।

IT sector में जो capital आई, वह defensive rotation की तरह दिखती है। जब Oil Marketing Companies (OMCs) — HPCL, BPCL, IOC — petrol-diesel price hike के बाद 3% ऊपर गईं, और जब Adani Group के stocks US DOJ के charges हटने पर 3-7% उछले, तब भी IT का movement इन triggers से independent रहा। Wipro को Nifty 50 से बाहर किया जाना तय माना जा रहा है और BSE को include करने की चर्चा है — फिर भी IT sector ने अपनी रैली अलग reasoning पर चलाई।

यहाँ असल तनाव है: जब Infosys के Q4 variable pay सबसे ऊँचे 3 सालों में थे, उस quarter के बाद bonus काटे गए। TCS के CFO ने माना कि AI से industry revenue को खतरा है। फिर भी इस sector में capital क्यों आई? एक explanation यह है कि rupee की कमज़ोरी ने dollar-earning IT companies को relative safe haven बना दिया। लेकिन अगर यही logic है, तो rupee के 97 के पार जाने पर IT और चढ़नी चाहिए — और यही वह condition है जो इस तेज़ी को test करेगी।

आगे क्या — IT की यह तेज़ी कहाँ टूट सकती है?

वह unresolved question यह है: क्या IT sector की यह rally dollar-hedge है, या यह genuine earnings revision की शुरुआत है? अगर सिर्फ currency hedge है, तो यह capital उसी रफ़्तार से निकल सकती है जिस रफ़्तार से आई।

2008 के बाद IT valuations उस level पर थे जहाँ institutional investors ने "value trap" की बात की थी — sector cheap दिखता था, लेकिन earnings growth रुकी हुई थी। आज Standard Chartered 7,000-7,800 jobs काट रहा है AI की वजह से। यह banking sector में हो रहा है, लेकिन IT service providers का एक बड़ा client base यही financial institutions हैं। अगर global banks AI-led cost cuts की वजह से IT outsourcing कम करें, तो Nifty IT की यह तेज़ी जिस नींव पर खड़ी है, वह हिल सकती है।

दूसरी तरफ, अगर rupee 97-98 के पार जाता है और global demand resilient रहती है, तो IT की dollar earnings में conversion premium और बढ़ेगा — और आज की rally एक longer rotation की शुरुआत हो सकती है। Continuation का signal होगा: अगर अगले quarterly earnings में Infosys या TCS dollar revenue guidance ऊपर की तरफ revise करे। Breakdown का signal होगा: अगर Nifty IT 25,000 का level hold न कर पाए और FII outflows फिर शुरू हों। RBI का रिकॉर्ड ₹3 लाख करोड़ dividend सरकार को fiscal cushion देगा, लेकिन rupee की कमज़ोरी पर इसका असर सीमित है — और जब तक rupee दबाव में है, IT की यह तेज़ी currency bet है, earnings bet नहीं। अगर rupee stabilize हो जाए, तो वही moment होगा जब पता चलेगा कि IT में आई capital टिकती है या निकल जाती है।

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