ONGC का मुनाफा उछला|उत्पादन कब लौटेगा?

· NIFTY

मुनाफा बनाम उत्पादन

ONGC के तिमाही नतीजों की पहली तस्वीर बेहद मजबूत है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में स्टैंडअलोन मुनाफा 112 प्रतिशत बढ़कर ₹17,034 करोड़ और राजस्व 45.2 प्रतिशत बढ़कर ₹46,460 करोड़ हुआ। लेकिन यह उछाल उत्पादन बढ़ने से नहीं आया। कच्चे तेल की प्राप्ति कीमत 50.4 प्रतिशत बढ़कर 99.45 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि कच्चे तेल का उत्पादन 5.5 प्रतिशत और गैस उत्पादन 2 प्रतिशत घट गया।

लंबी अवधि की कहानी

यहीं आज की खबर ONGC को समझने का नजरिया बदलती है। पिछले कुछ दिनों की रिपोर्टों में कंपनी की कहानी गहरे समुद्र में लंबे समय की खोज और भारत की ऊर्जा-सुरक्षा से जुड़ी थी। ₹84,084 करोड़ के समुद्र मंथन कार्यक्रम के तहत ONGC सात वर्षों में 150 गहरे समुद्री कुएँ खोदने की योजना बना रही है। मंगलूरु में प्रस्तावित भंडारण क्षमता का आधा हिस्सा रणनीतिक रिजर्व के लिए रखा जाना भी कंपनी की राष्ट्रीय ऊर्जा भूमिका को मजबूत करता है। इससे यह पढ़ना आसान था कि ONGC केवल महंगे तेल से लाभ लेने वाली कंपनी नहीं, बल्कि भविष्य की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने वाली कंपनी भी है।

कीमत ने संभाली कमाई

मगर ताजा नतीजे बताते हैं कि निकट अवधि की कमाई का इंजन अभी मात्रा नहीं, कीमत है। कच्चे तेल की ऊँची कीमत ने हर बैरल पर अधिक कमाई दी, लेकिन कम बैरल का असर भी साथ आया। गैस कारोबार में कुछ वास्तविक सुधार जरूर दिखा। नए कुओं से गैस की प्राप्ति कीमत बढ़कर 13.31 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हुई और इस गैस से कंपनी को प्रशासित कीमत की तुलना में ₹1,897 करोड़ की अतिरिक्त आय मिली। फिर भी इसे उत्पादन-टर्नअराउंड कहना जल्दबाजी होगी।

समूह में छिपा जोखिम

एक और सावधानी समेकित आंकड़ों में छिपी है। मालिकों को मिलने वाला समेकित मुनाफा 21.37 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन पूरे समूह का तिमाही लाभ 43.27 प्रतिशत घट गया। वजह थी HPCL का ₹12,265 करोड़ का नुकसान, क्योंकि महंगे कच्चे तेल के बीच पेट्रोलियम उत्पादों पर अंडर-रिकवरी बढ़ी। यानी ONGC समूह में ऊपर की कड़ी को महंगे तेल से फायदा होता है, पर नीचे की कड़ी पर वही कीमत दबाव डाल सकती है। इसलिए सिर्फ स्टैंडअलोन मुनाफे को पूरे समूह की स्थायी कमाई समझना जोखिमपूर्ण है।

गिरावट की कई वजहें

उत्पादन में गिरावट का कारण भी एक ही नहीं था। कंपनी ने कृष्णा-गोदावरी ब्लॉक में रिजर्वॉयर की जटिलता, पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र में खराब समुद्री परिस्थितियों, पाइपलाइन बदलने में देरी और कुछ कुओं के अस्थायी बंद रहने का उल्लेख किया है। यह तथ्य गिरावट को केवल भूगर्भीय कमजोरी या केवल प्रबंधन की विफलता साबित नहीं करता। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि कीमत का लाभ कंपनी के नियंत्रण से बाहर के कारकों से आया, जबकि उत्पादन सुधार कंपनी के अपने निष्पादन पर निर्भर है।

अगली तिमाहियों की कसौटी

अगले दो-तीन वर्षों में पश्चिमी अपतटीय परिसंपत्तियों पर ₹40,000 करोड़ से अधिक का पूंजीगत खर्च उत्पादन को फिर बढ़ाने का कंपनी का प्रमुख दावा है। समुद्र मंथन के तहत खोजी जा रही परियोजनाएँ इससे भी लंबी, सात साल की समय-सीमा रखती हैं। इसलिए असली निगरानी-बिंदु अगली तिमाहियों में तेल और गैस की मात्रा, नए कुओं की हिस्सेदारी और HPCL की अंडर-रिकवरी होंगे। केवल ऊँची प्राप्ति कीमत इस सवाल का जवाब नहीं देगी कि कंपनी की कमाई कितनी टिकाऊ है।

निवेशक के लिए निष्कर्ष

धारक के लिए आज का संदेश यह है कि 112 प्रतिशत मुनाफे को सामान्य कमाई का नया आधार न मानें। यह मजबूत कमोडिटी-एक्सपोजर और बेहतर गैस रियलाइजेशन का प्रमाण है, लेकिन उत्पादन वापसी का नहीं। देखने वाले निवेशक को ONGC में दो अलग कहानियाँ अलग रखनी होंगी: आज का तेल-मूल्य लाभ और कल का उत्पादन-सुधार। अभी उपलब्ध साक्ष्य पहली कहानी को साबित करते हैं; दूसरी कहानी का फैसला परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और वास्तविक उत्पादन बढ़ने पर होगा।

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