Rajesh Exports SEBI 15.15 लाख करोड़|30 साल की Standing Read में बदलाव

· NIFTY

SEBI का आरोप और Valcambi की Accounting — नींव की जांच

3 जून 2026 को SEBI ने एक अंतरिम आदेश जारी किया। इस आदेश ने Rajesh Exports की नींव को हिलाकर रख दिया। SEBI का आरोप है कि कंपनी ने FY21 से FY25 के बीच ₹15.15 लाख करोड़ की आय गलत तरीके से दर्ज की। यह राशि कंपनी की कुल रिपोर्टेड consolidated आय का 99.8 प्रतिशत है। अगर SEBI सही है, तो यह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट लेखा घोटाला होगा। Satyam घोटाला ₹7,136 करोड़ का था। Rajesh Exports पर आरोप उससे कई सौ गुना बड़ा है।

लेकिन BW Businessworld ने 12 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रतिप्रश्न उठाया। एक पेट्रोल पंप मालिक साल में ₹100 करोड़ का ईंधन बेचता है। उसका मार्जिन सिर्फ ₹2 करोड़ है। अगर कोई नियामक ₹100 करोड़ के टर्नओवर को देखकर कहे कि ₹98 करोड़ काल्पनिक आय है — यह निष्कर्ष गलत होगा। BW का तर्क यही है कि SEBI ने Rajesh Exports के साथ यही किया।

Rajesh Exports की Swiss subsidiary Valcambi SA दुनिया की सबसे बड़ी gold refineries में से एक है। Valcambi तीसरे पक्षों से कच्चा सोना लेकर उसे refine करती है। इस प्रक्रिया में सोने का पूरा gross value Valcambi की consolidated आय में दर्ज होता है। KPMG-audited Valcambi standalone accounts में केवल processing margin दर्ज है। यह अंतरराष्ट्रीय gold refining उद्योग का मानक लेखांकन तरीका है।

SEBI का अपना आदेश Page 17 पर GGR की consolidated revenues दिखाता है। GGR वह holding entity है जो Valcambi के ऊपर है। FY21 में GGR की consolidated revenue लगभग ₹2,30,555 करोड़ दर्ज है। SEBI ने इन्हें "unaudited" कहा — लेकिन ये figures consolidated स्तर पर मौजूद थे। Valcambi standalone में ₹543 करोड़ और GGR consolidated में ₹2,30,555 करोड़ — यह अंतर gold pass-through accounting से उत्पन्न होता है। यह fraud नहीं, refining business का structural feature हो सकता है।

यहां दो विपरीत hidden assumptions टकराती हैं। SEBI का assumption: gross commodity revenue = fabricated revenue। कंपनी और BW का assumption: gross revenue = gold refiner के लिए मानक लेखांकन। इन दोनों में से कौन सा सही है — यह holder के लिए निर्णायक प्रश्न है। क्योंकि अगर SEBI की methodology गलत है, तो दो lower circuits में हुई गिरावट अनुपातहीन हो सकती है। और अगर SEBI सही है, तो 30 वर्षों की corporate trust का पूर्ण विघटन है।

LIC की चेतावनी — संस्थागत चुप्पी का रिकॉर्ड

SEBI का आदेश 3 जून 2026 को आया। लेकिन LIC की चिंताएं उससे कई वर्ष पहले सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज थीं। LIC Rajesh Exports की सबसे बड़ी संस्थागत शेयरधारक है — लगभग 10.8-11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ। LIC ने अपने voting disclosures में बार-बार स्पष्ट किया था। कंपनी के financial statements में transparency की कमी है। disclosures अपर्याप्त हैं। interest income का वर्गीकरण गलत है।

ये सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद थे — फिर भी वर्षों तक कोई बड़ी नियामकीय कार्रवाई नहीं हुई। Canara Bank का ₹509 करोड़ का recovery case भी कंपनी के खिलाफ लंबित था। Banking और insurance — दोनों क्षेत्रों में संस्थागत संकेत visible थे। NFRA ने भी auditors के खिलाफ जांच शुरू की। BDO forensic audit SEBI ने commissioned किया — यह 2024 में शुरू हुआ।

holder के लिए यह बिंदु महत्वपूर्ण है। जो governance concerns LIC ने वर्षों पहले उठाए थे, वे public record में थे। फिर भी कंपनी का share price उन वर्षों में निवेशकों का विश्वास बनाए रखता रहा। auditors ने accounts को pass किया। bankers ने financing जारी रखी। नियामक मार्च 2024 की shareholder complaint तक चुप रहे।

यहां एक hidden assumption surface होती है। जो निवेशक Rajesh Exports में था, उसने यह assume किया था। LIC की उपस्थिति governance का signal है। लेकिन LIC की उपस्थिति और LIC की active governance monitoring — दोनों अलग हैं। LIC ने चेतावनी दी, लेकिन उस चेतावनी पर कार्रवाई नहीं हुई।

अब SEBI के आदेश के बाद LIC का exposure दोहरा है। पहला: शेयरधारक के रूप में — LIC के policyholder wealth में लगभग ₹300 करोड़ की गिरावट। दूसरा: governance failure के co-witness के रूप में — जिसने चेतावनी दी पर intervention नहीं किया। LICI holder के लिए यह देखना जरूरी है कि Rajesh Exports में LIC का actual exposure size क्या है। क्योंकि यह LIC की broader governance credibility से जुड़ा सवाल बन गया है।

Standing Read का बदलाव — Holder के आगे के Checkpoints

Rajesh Exports 30 वर्षों से भारतीय उद्यमशीलता का प्रतीक था। 2015 में Valcambi SA का $400 million (₹3,831 करोड़) में अधिग्रहण वैश्विक स्तर पर चर्चित हुआ था। REL world के 35% सोने को process करने का दावा करती थी। PLI scheme के तहत 5 GWh battery manufacturing capacity भी मिली थी। promoter Rajesh Mehta को एक successful first-generation entrepreneur के रूप में जाना जाता था।

SEBI के आदेश के बाद यह standing read बदल गई है। चाहे SEBI का आरोप अंततः सही साबित हो या गलत — holder की स्थिति पहले जैसी नहीं है। promoter को securities market से बाहर कर दिया गया है। stock ने लगातार दो दिन 5% lower circuit देखा। February 2023 के ₹1,028 peak से June 2026 में ₹80.11 तक — यह गिरावट पहले से visible थी।

holder को अब तीन checkpoints पर नजर रखनी होगी।

पहला checkpoint: Rajesh Exports की legal challenge का परिणाम। कंपनी ने SEBI के आदेश को court में चुनौती दी है। अगर court ने Valcambi gross revenue model को valid माना, तो narrative fundamentally बदलेगी। यह वह moment होगा जब SEBI की methodology पर judicial review आएगा।

दूसरा checkpoint: PLI removal पर सरकार का निर्णय। PMO ने SEBI allegations के बाद battery PLI scheme की जांच शुरू की है। PLI benefits के बिना कंपनी की operational structure अलग दिखेगी। यह एक quantifiable operational risk है जो pure accounting debate से अलग है।

तीसरा checkpoint: NFRA और SEBI की अगली कार्रवाई। SEBI Chief ने कहा है कि quasi-judicial process चलने दिया जाएगा। NFRA ने auditors के खिलाफ जांच शुरू की है। अगर auditors को दोषी पाया गया, तो Valcambi accounting model की independent validation होगी — या नहीं होगी।

holder के लिए core प्रश्न यह नहीं है कि SEBI सही है या गलत। core प्रश्न यह है कि इन तीन checkpoints के resolve होने तक uncertainty का मूल्य क्या है। क्योंकि uncertainty खुद एक risk है — चाहे underlying accounting सही हो या गलत। और यह uncertainty SEBI के आदेश ने नहीं बनाई। यह LIC की पहली voting disclosure के दिन से exist करती थी। SEBI के आदेश ने केवल उसे visible किया।

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