Rupee 96 तोड़ा|तेल संकट कहाँ तक जाएगा?

· NIFTY

रुपया 96 के पार

आज भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 96.14 के स्तर तक गिरा — लेकिन सिर्फ यह संख्या नहीं बताती कि असली खतरा कहाँ है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के चलते कच्चा तेल $109 प्रति बैरल पर पहुँच गया। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85% आयात करता है। जैसे ही आयात बिल बढ़ा, विदेशी निवेशकों ने इक्विटी बाजार से पूंजी निकालनी शुरू की। इस सप्ताह FII ने भारतीय शेयरों में करीब 2,940 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की — और यह निकासी सीधे डॉलर-रुपया विनिमय दर पर गिरी।

Sensex 450 अंक और Nifty 50 करीब 150 अंक नीचे बंद हुए। लेकिन जो बात कम कही गई वह यह है: सरकार अभी प्रतिदिन करीब 1,000 करोड़ रुपये तेल कंपनियों के नुकसान को अपने खाते में उठा रही है ताकि खुदरा पेट्रोल-डीज़ल कीमतें सीमित रखी जाएँ। यह सब्सिडी का बोझ राजकोषीय घाटे का जोखिम उठाता है — जो रुपये पर दीर्घकालिक दबाव का अलग स्रोत है।

96 का स्तर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मनोवैज्ञानिक सीमा थी। जब यह टूटी तो FII के एल्गोरिदमिक स्टॉप-लॉस ऑर्डर ट्रिगर हुए और अल्पकालिक गिरावट तेज हुई। लेकिन घरेलू म्यूचुअल फंड और इंस्टिट्यूशनल निवेशकों ने 452 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे — जो संकेत है कि वे डॉलर-मजबूती के बावजूद घरेलू ऋण बाजार में मूल्य देख रहे हैं। फिर भी, जब तक कच्चे तेल की कीमत $109 के आसपास रहती है, रुपये की दिशा नहीं पलटेगी।

रक्षा बनाम ऊर्जा

रुपये की गिरावट जिस कारण से आई — पश्चिम एशिया का तनाव — उसी कारण ने एक दूसरे घरेलू क्षेत्र में पूरी तरह उलटी दिशा में पूंजी खींची।

Solar Industries ने Q4 में शुद्ध मुनाफा 61% बढ़ाकर 556 करोड़ रुपये दर्ज किया। राजस्व 41% उछला और रक्षा ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर है। प्रबंधन ने FY27 में 42% राजस्व वृद्धि का अनुमान दिया है। नतीजा: शेयर आज भारी गिरावट वाले बाजार में विपरीत दिशा में चला और ऊपर बंद हुआ।

यहाँ असली causal कड़ी यह है: हॉर्मुज़ संकट ने भारत सरकार को रक्षा खर्च तेज करने पर मजबूर किया। Solar Industries जैसी घरेलू रक्षा आपूर्तिकर्ता कंपनियों को इस बजट का सीधा लाभ मिला। खुदरा और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने FII बिकवाली से खाली हुई जगह भरते हुए Solar Industries में खरीदारी की — यह रोटेशन वॉल्यूम डेटा से पुष्ट होता है।

लेकिन यहाँ एक अनसुलझा सवाल है: क्या रक्षा क्षेत्र की यह तेजी टिकेगी अगर हॉर्मुज़ संकट कम हो? अगर ईरान-अमेरिका वार्ता सफल रही तो तेल की कीमत गिरेगी, रुपया मजबूत होगा — लेकिन तब रक्षा ऑर्डर प्रवाह की तात्कालिकता भी घटेगी। Solar Industries का मौजूदा मूल्यांकन इस geopolitical प्रीमियम को अंदर समेटे हुए है।

आगे का रास्ता

अब दोनों धाराएँ — रुपये की कमजोरी और रक्षा की मजबूती — एक ही बिंदु पर आकर मिलती हैं: कच्चे तेल की कीमत।

अगर कच्चा तेल $109 से ऊपर रहा तो रुपया 97-98 की तरफ बढ़ सकता है। FII की बिकवाली जारी रहेगी और सरकारी सब्सिडी भार राजकोषीय चिंता बनेगा। इस स्थिति में Sensex पर 74,000 का स्तर परीक्षण में आ सकता है — जो मई की शुरुआत के 75,400 से करीब 2% नीचे है।

दूसरी दिशा में: PM Modi ने UAE के साथ LPG और तेल भंडार की नई व्यवस्था की है। यह हॉर्मुज़ जोखिम के खिलाफ एक हेज है। अगर यह समझौता आपूर्ति को स्थिर करता है और तेल $100 से नीचे आता है, तो रुपया 94-95 की वापसी कर सकता है। उस परिदृश्य में FII का रुख पलटेगा और Nifty के लिए 24,000 का लक्ष्य फिर से दिखेगा।

झुकाव यह है: तेल की कीमत का दबाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। FII net position और रुपया दोनों नकारात्मक दिशा में हैं। लेकिन अगर कल का CPI डेटा या RBI का कोई हस्तक्षेप बाजार को चौंकाता है — तो 96.14 का रुपया स्तर वह संख्या होगी जिसे फिर से पार करना होगा यह साबित करने के लिए कि तस्वीर बदली है।

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