इंडिगो 238 करोड़ का घाटा|रिकॉर्ड राजस्व के बीच फ्यूल झटका

· NIFTY

रिकॉर्ड राजस्व, फिर भी घाटा

इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन ने जून तिमाही में 238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह चौंकाने वाला है क्योंकि इसी तिमाही में राजस्व 20% बढ़कर 24,584 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, और यात्री किराया दर 21% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर रही।

एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी को 2,176 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। यानी राजस्व और किराया दोनों रिकॉर्ड पर होने के बावजूद कंपनी मुनाफे से सीधे घाटे में चली गई। सवाल यह है कि आखिर बीच में क्या टूटा।

फ्यूल खर्च और वैश्विक ट्रांसमिशन

जवाब फ्यूल खर्च में छिपा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल का खर्च साल-दर-साल 86% बढ़कर 10,832 करोड़ रुपये हो गया, जो अब कुल राजस्व का 44% हिस्सा बन चुका है, जबकि पिछले साल यह औसतन करीब 30% ही था। इसी उछाल ने EBITDAR को 33% नीचे धकेल दिया।

यह फ्यूल उछाल घरेलू घटना नहीं है। पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक कच्चे तेल और एटीएफ कीमतों को बढ़ाया, जिसने सीधे इंडिगो की लागत संरचना पर दबाव डाला। यानी विदेशी भू-राजनीतिक झटका सीधे घरेलू विमानन कंपनी के मार्जिन तक पहुंच गया।

दिलचस्प बात यह है कि ऊंचे किराए के बावजूद यात्री मांग स्थिर रही और यात्री संख्या साल-दर-साल लगभग सपाट रही। कंपनी ने किराया बढ़ाकर लागत का बड़ा हिस्सा ग्राहकों पर डाला, लेकिन फ्यूल की रफ्तार इतनी तेज थी कि यह भरपाई नाकाफी साबित हुई।

ब्रोकरेज विभाजन — कौन सही?

नतीजों के बाद ब्रोकरेज खेमों में साफ बंटवारा दिख रहा है। Investec अकेली प्रमुख ब्रोकरेज है जिसने 'Sell' रेटिंग बरकरार रखी और लक्ष्य मूल्य 4,050 रुपये तय किया। उसका तर्क है कि फ्यूल लागत का दबाव और पश्चिम एशिया की अस्थिरता आगे भी मुनाफे पर भारी पड़ती रहेगी।

इसके उलट Kotak Institutional Equities ने 'Buy' रेटिंग बनाए रखी, भले ही लक्ष्य मूल्य 6,300 से घटाकर 5,900 रुपये किया। उसका कहना है कि कंपनी ने किराया बढ़ाकर लागत का बड़ा हिस्सा पहले ही वसूल लिया है, और एयर इंडिया की क्षमता कटौती से आगे किराया मजबूत बना रहेगा। Citi ने भी 5,800 के लक्ष्य के साथ 'Buy' दोहराया, जबकि JPMorgan ने 4,740 के लक्ष्य पर 'Neutral' रखा।

यह असहमति एक ही आंकड़े की दो अलग व्याख्याओं से पैदा होती है। बहुसंख्यक ब्रोकरेज मानते हैं कि यह फ्यूल-चालित, अस्थायी झटका है जो किराया बढ़ोतरी से संभल जाएगा। Investec का मानना है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता और उतार-चढ़ाव वाली एटीएफ कीमतें अगली कई तिमाहियों तक मार्जिन को अस्थिर बनाए रखेंगी।

आगे क्या देखें

कंपनी के प्रबंधन ने खुद सितंबर तिमाही के लिए एक ठोस पैमाना दिया है। प्रबंधन को उम्मीद है कि यात्री राजस्व प्रति उपलब्ध सीट किलोमीटर, यानी PRASK, में 25% से अधिक की साल-दर-साल बढ़ोतरी जारी रहेगी, भले ही तिमाही चुनौतीपूर्ण बनी रहे और क्षमता वृद्धि सिंगल डिजिट में सीमित रहे।

मौजूदा होल्डर के लिए यह अगली तिमाही में PRASK गाइडेंस के पूरा होने पर टिका फैसला है — अगर 25% की बढ़ोतरी वास्तव में दिखती है, तो यह मौजूदा गिरावट को अस्थायी झटका साबित करता है और होल्डिंग बनाए रखने का आधार बनता है। लेकिन अगर PRASK ग्रोथ इस स्तर से पीछे रहती है जबकि एटीएफ कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो यह इशारा करेगा कि मार्जिन दबाव अस्थायी नहीं बल्कि ढांचागत है। नए प्रवेशक के लिए निर्णायक चर एक ही है, आने वाले हफ्तों में एटीएफ की कीमत की दिशा — गिरावट की स्थिति में यह प्रवेश का मौका बनता है, ऊंची बनी रहने की स्थिति में यह जाल साबित हो सकता है।

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