ज़ेन टेक्नोलॉजीज|मुनाफा 27.8% गिरा, फिर भी 68 विश्लेषक खरीदें पर कायम

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कमजोर तिमाही

ज़ेन टेक्नोलॉजीज के शेयर सोमवार को शुरुआती कारोबार में 10 प्रतिशत से अधिक टूटकर 1,585.55 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गए। यह गिरावट जून तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद आई, जिसमें कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 27.8 प्रतिशत घटकर 34.4 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले यह 48 करोड़ रुपये था।

राजस्व सालाना आधार पर 10.5 प्रतिशत घटकर 141.6 करोड़ रुपये रहा। लेकिन असली चिंता मुनाफे में गिरावट से कहीं ज्यादा गहरी थी। एबिटा 40.2 प्रतिशत लुढ़ककर 38.7 करोड़ रुपये पर आ गया, और एबिटा मार्जिन 40.9 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 27.3 प्रतिशत रह गया। कर्मचारी खर्च राजस्व के 20 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया, जबकि अन्य खर्च लगभग दोगुने होकर 21 प्रतिशत पहुंच गए — यानी यह सिर्फ धीमी बिक्री की कहानी नहीं, बल्कि लागत के दबाव की कहानी भी है।

इसके बावजूद ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, इस स्टॉक को ट्रैक करने वाले आठ विश्लेषकों में से छह ने अब भी 'खरीदें' रेटिंग बरकरार रखी है, और बाकी दो ने 'होल्ड' दी है। कोई भी विश्लेषक इस बिकवाली के बाद स्टॉक को 'बेचने' की सलाह नहीं दे रहा। यह विरोधाभास सवाल खड़ा करता है — अगर तिमाही नतीजे इतने कमजोर हैं, तो बाजार के ज्यादातर जानकार अब भी इस रक्षा तकनीक कंपनी पर भरोसा क्यों बनाए हुए हैं?

ऑर्डर बुक की परीक्षा

जवाब का पहला सिरा कंपनी की ऑर्डर बुक में छिपा है। 30 जून 2026 तक ज़ेन टेक्नोलॉजीज की समेकित ऑर्डर बुक 1,239.02 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष के अंत से करीब 7 प्रतिशत कम है। कंपनी के प्रबंधन ने कहा कि नई ऑर्डर आमद के सहारे दूसरी तिमाही से निष्पादन में तेजी आने की उम्मीद है। यानी कमजोर तिमाही मांग की कमी नहीं बल्कि निष्पादन की धीमी रफ्तार का नतीजा बताई जा रही है।

इसी दावे को कंपनी के अपने बयान से बल मिलता है। ज़ेन टेक्नोलॉजीज ने बताया, हम एफवाई27 में स्पष्ट निष्पादन दृश्यता के साथ दाखिल हुए, हमने 30 जून 2026 तक 1,239.02 करोड़ रुपये की समेकित ऑर्डर बुक के साथ तिमाही बंद की और इसके बाद जुलाई 2026 में टैंक व क्रू गनरी सिमुलेटर के अपग्रेडेशन के लिए 177.50 करोड़ रुपये का एक और सिमुलेटर ऑर्डर प्राप्त किया। यह रक्षा मंत्रालय का घरेलू ऑर्डर है, और प्रवर्तकों का इसे देने वाली संस्था में कोई हित नहीं है।

इससे तस्वीर थोड़ी बदल जाती है। निवेशक अब सिर्फ बीती तिमाही के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि आगे के ऑर्डर प्रवाह पर दांव लगा रहे प्रतीत होते हैं। जब मार्च तिमाही में मुनाफा 68.8 प्रतिशत तक गिरा था, तब भी नए रक्षा ऑर्डर के एलान के बाद शेयर करीब 4 प्रतिशत चढ़ गए थे। यही पैटर्न अब दोहराए जाने की उम्मीद बाजार के एक हिस्से में बनी हुई है।

एक ही दिन दो कहानियां

नतीजों वाले दिन के ठीक अगले दिन, सोमवार को ही, कंपनी ने कारगिल विजय दिवस के मौके पर एक नया हाई-एल्टीट्यूड मैन-पोर्टेबल एंटी-ड्रोन सिस्टम पेश किया। यह प्रणाली 400 मेगाहर्ट्ज से 6 गीगाहर्ट्ज़ स्पेक्ट्रम स्कैन कर 5 किलोमीटर तक ड्रोन का पता लगा सकती है और 3 किलोमीटर तक जैमिंग कर सकती है, जिसे ऊंचाई और सीमावर्ती इलाकों में तैनाती के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यहीं असली तनाव सामने आता है। एक तरफ कंपनी अपने काउंटर-ड्रोन पोर्टफोलियो का विस्तार कर स्वदेशी रक्षा उत्पादन में स्थान मजबूत कर रही है, तो दूसरी तरफ उसी तिमाही में कर्मचारी और परिचालन लागत बढ़ने से मार्जिन पर सीधा दबाव दिख चुका है। नया उत्पाद भविष्य की राजस्व संभावना है, पर तत्काल मार्जिन राहत नहीं। दोनों खबरें एक साथ आना निवेशकों के लिए भ्रम की स्थिति बनाता है — किस पर भरोसा करें, आज के आंकड़ों पर या कल की संभावना पर।

उपलब्ध आंकड़े दिखाते हैं कि यह गिरावट मांग के संकट से नहीं बल्कि निष्पादन की धीमी गति और बढ़ती लागत से जुड़ी है, जबकि ऑर्डर बुक और ताज़ा रक्षा अनुबंध कंपनी की मध्यम अवधि की संभावना को सहारा देते हैं। इसीलिए अधिकांश विश्लेषक तुरंत बिकवाली की सलाह देने से बचे हैं। असली फैसला दूसरी तिमाही के आंकड़ों पर टिका है — प्रबंधन ने खुद कहा है कि निष्पादन में तेजी वहीं से दिखनी शुरू होगी। तब तक स्टॉक कमजोर नतीजों और मजबूत ऑर्डर-प्रवाह के बीच झूलता रहेगा, और यही अनिश्चितता आज की गिरावट के पीछे की असली वजह है।

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