थर्मैक्स|83% मुनाफा गिरावट बनाम 23% ऑर्डर बुक वृद्धि

· NIFTY

16% की गिरावट, तीन महीने का न्यूनतम स्तर

शुक्रवार को थर्मैक्स के शेयर इंट्राडे में 16 प्रतिशत तक टूटकर 3,566.90 रुपये पर आ गए, जो तीन महीने का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट पिछले 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर 5,277 रुपये से 32 प्रतिशत नीचे है। ब्लूमबर्ग के अनुसार यह पिछले 15 महीनों की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट थी।

जून तिमाही में थर्मैक्स का समेकित शुद्ध लाभ 83.4 प्रतिशत गिरकर सिर्फ 25.24 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल यह 152.4 करोड़ रुपये था। यह बाजार के 151 करोड़ रुपये के अनुमान से भी 83 प्रतिशत कम है। EBITDA मार्जिन भी 10.42 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 3.02 प्रतिशत रह गया।

कंपनी ने बताया कि इंडस्ट्रियल इंफ्रा सेगमेंट के एक प्रोजेक्ट में लागत बढ़ने से 91 करोड़ रुपये का एकबारगी झटका लगा, और पिछले साल की तुलना में इस बार सरकारी प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली 56 करोड़ रुपये की आय भी नहीं मिली। इसके बावजूद परिचालन राजस्व 7 प्रतिशत बढ़कर 2,303 करोड़ रुपये रहा, यानी मूल कारोबार सिकुड़ा नहीं बल्कि एक विशेष झटके ने मुनाफे को दबाया।

ऑर्डर बुक मजबूत, पर सवाल बरकरार

जहां मुनाफे में भारी गिरावट आई, वहीं थर्मैक्स की ऑर्डर बुक 30 जून तक साल-दर-साल 23 प्रतिशत बढ़कर 14,045 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी ने इस तिमाही में अमेरिका में एक डेटा सेंटर परियोजना के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा ऑर्डर भी हासिल किया। यह आंकड़ा बताता है कि भविष्य की मांग कमजोर नहीं दिखती।

शेयर में शुरुआती गिरावट के बाद कंपनी प्रबंधन ने एनालिस्ट कॉल में कहा कि वित्त वर्ष 2027 की हर तिमाही में राजस्व की रन-रेट 3,000 करोड़ रुपये से अधिक रहेगी, और आगे मार्जिन में सुधार होगा। प्रबंधन ने यह भी कहा कि तिमाही में लगी चोट सरकारी परियोजना और मध्य-पूर्व में लॉजिस्टिक्स बाधा से जुड़ी एकबारगी घटना थी, आगे ऐसी कोई चोट नहीं दिखती।

प्रबंधन के इस भरोसे के बाद बाजार की प्रतिक्रिया बदली। दोपहर 12 बजे तक शेयर की गिरावट 14 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 5.5 प्रतिशत रह गई और भाव 4,014 रुपये पर आ गया। यानी सुबह के झटके को बाजार ने पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन प्रबंधन के भरोसे ने बिकवाली की रफ्तार जरूर धीमी कर दी।

ब्रोकरेज बंटे, असली सवाल आगे

इस नतीजे पर ब्रोकरेज एक राय में नहीं हैं। जेएम फाइनेंशियल ने 3,075 रुपये का लक्ष्य रखते हुए स्टॉक पर सेल रेटिंग दी, यह कहते हुए कि एकबारगी लागत हटाने के बाद भी समायोजित EBITDA मार्जिन उनके अनुमान से कम रहा। वहीं यूबीएस ने 5,600 रुपये के लक्ष्य के साथ खरीद की सलाह बरकरार रखी। 22 एनालिस्टों में से सिर्फ 5 के पास खरीद रेटिंग है, जबकि 8 बिकवाली की सलाह दे रहे हैं।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, एकबारगी लागत हटाकर भी समायोजित EBITDA मार्जिन साल-दर-साल घटकर 6.9 प्रतिशत रहा, जबकि इंडस्ट्रियल इंफ्रा सेगमेंट का समायोजित मार्जिन सिर्फ 2.5 प्रतिशत रहा, जो एमओएफएसएल के 4 प्रतिशत के अनुमान से भी कम है। इससे पता चलता है कि कमजोरी सिर्फ एक झटके तक सीमित नहीं, बल्कि परिचालन दबाव व्यापक है।

थर्मैक्स की कहानी अभी सुलझी नहीं है। ऑर्डर बुक और प्रबंधन का भरोसा एक तरफ खींचते हैं, जबकि समायोजित मार्जिन में गिरावट और ब्रोकरेज की बंटी राय दूसरी तरफ। अगली दो तिमाहियों में इंडस्ट्रियल इंफ्रा सेगमेंट के निष्पादन और मार्जिन सुधार की गति ही तय करेगी कि यह गिरावट एक अस्थायी झटका थी या गहरे दबाव की शुरुआत।

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