महिंद्रा एंड महिंद्रा|मार्जिन दबाव बनाम 34% कंसॉलिडेटेड उछाल

· NIFTY

मुनाफा बनाम मार्जिन

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने जून तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं, और पहली नजर में तस्वीर उत्साहजनक लगती है। स्टैंडअलोन आधार पर कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹3,685 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में केवल 6.8% ज्यादा है। राजस्व 23% बढ़कर ₹41,920 करोड़ पहुंचा, और ऑटोमोटिव वॉल्यूम में भी 23% की उछाल दर्ज हुई।

लेकिन जब हम मार्जिन को देखते हैं तो एक विरोधाभास सामने आता है। EBITDA मार्जिन पिछले साल के 14.3% से घटकर इस तिमाही 12.2% पर आ गया, यानी 210 बेसिस पॉइंट का संकुचन। कंपनी ने खुद बताया कि कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते मिश्रण ने मार्जिन पर दबाव डाला। तो सवाल उठता है, राजस्व और वॉल्यूम में तेज ग्रोथ के बावजूद मुनाफे की रफ्तार इतनी धीमी क्यों रही?

यहीं पर तस्वीर बदलती है। कंसॉलिडेटेड आधार पर, यानी पूरे समूह को मिलाकर, M&M का मुनाफा ₹5,454 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 34% ज्यादा है। इसका मतलब है कि स्टैंडअलोन कमजोरी को समूह की सहायक कंपनियों ने भरपाई से ज्यादा संतुलित कर दिया। ग्रुप सीईओ अनीश शाह ने बताया कि समूह की तथाकथित ग्रोथ जेम्स कंपनियों का मुनाफा तीन गुना बढ़ा है। तो मूल वाहन कारोबार पर दबाव के बावजूद, समूह की समग्र आय मजबूत बनी हुई है।

ट्रक-बस कारोबार का बंटवारा

नतीजों के साथ-साथ M&M के बोर्ड ने एक बड़ा पुनर्गठन भी मंजूर किया है, और बाजार की प्रतिक्रिया नाटकीय रही। SML महिंद्रा के शेयर लगातार दूसरे दिन 20% के अपर सर्किट में बंद रहे, और सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक 41% उछल चुका है। यह हलचल M&M के उस फैसले के बाद शुरू हुई जिसमें उसने अपने ट्रक और बस डिवीजन को SML महिंद्रा को हस्तांतरित करने की योजना का ऐलान किया।

सौदे की शर्तें साफ हैं। M&M अपने ट्रक एंड बस डिवीजन को स्लंप सेल के जरिए ₹525 करोड़ में SML महिंद्रा को हस्तांतरित करेगा, और इस पर आठ अगस्त 2026 तक करार होने की उम्मीद है, जबकि पूरा लेनदेन जनवरी 2027 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद SML महिंद्रा के अंतर्गत हल्के, मध्यम और भारी ट्रकों के साथ-साथ बसों का पूरा पोर्टफोलियो एक ही सूचीबद्ध इकाई के तहत आ जाएगा। हालांकि, उत्पादन में कोई रुकावट न आए इसके लिए महिंद्रा ब्रांड के ट्रक और बस अभी भी M&M द्वारा ही एक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था के तहत बनाए जाते रहेंगे।

ग्रुप सीईओ अनीश शाह के मुताबिक, यह विलय दोनों कंपनियों को अलग-अलग हासिल न कर सकने वाली क्षमता को साथ में हासिल करने का मौका देगा, और संयुक्त इकाई कमर्शियल व्हीकल क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों को टक्कर देने की स्थिति में आ जाएगी। कंपनी का लक्ष्य 2031 तक क्षमता दोगुनी करने का है। इसलिए स्टैंडअलोन मार्जिन में गिरावट भले ही तिमाही की सुर्खी हो, असली दांव यह है कि M&M अपने कमर्शियल व्हीकल कारोबार को एक अलग, केंद्रित इकाई में समेटकर आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा में मजबूती से उतरने की तैयारी कर रहा है। निवेशकों के लिए अगला पड़ाव करार पर हस्ताक्षर और नियामकीय मंजूरियों की प्रगति पर नजर रखना होगा।

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