लार्सन एंड टूब्रो|मुनाफ़ा 14% बढ़ा, पर मार्जिन घटा

· NIFTY

मुनाफ़ा बढ़ा, पर मार्जिन का सवाल अनुत्तरित

लार्सन एंड टूब्रो ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में ₹4,123 करोड़ का कंसॉलिडेटेड मुनाफ़ा दर्ज किया, जो पिछले साल से 14% ज़्यादा है। कंपनी का राजस्व भी 7% बढ़कर ₹67,942 करोड़ पहुंच गया। नतीजों के बाद बुधवार को शेयर लगभग 4% उछलकर ₹3,967 के आसपास कारोबार कर रहा था।

लेकिन इस मुनाफ़े की तस्वीर उतनी सीधी नहीं जितनी हेडलाइन बताती है। कंपनी के CFO आर शंकर रमन ने खुद कहा कि यह ग्रोथ मुख्यतः ऑपरेशनल दक्षता और ट्रेज़री गेन्स से आई, जबकि EBITDA सालाना आधार पर 3% घट गया। यानी मूल कारोबार का मार्जिन दबाव में है, भले ही बॉटम-लाइन आकर्षक दिखे।

शंकर रमन ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में कामकाज जारी है, लेकिन सप्लाई चेन बाधाओं की वजह से क्रियान्वयन की रफ़्तार धीमी हुई है। इसके बावजूद इस क्षेत्र से ऑर्डर इनफ़्लो बढ़ा है, जो कंपनी के लचीलेपन का संकेत देता है। तो सवाल यह बनता है कि क्या बढ़ता ऑर्डर-बुक आने वाली तिमाहियों में मार्जिन दबाव को पीछे छोड़ देगा।

₹1,08,014 करोड़ के नए ऑर्डर, चार दिन की लगातार जीत

L&T ने इस तिमाही में कुल ₹1,08,014 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए, जो सालाना आधार पर 14% ज़्यादा है। इसमें से ₹60,702 करोड़, यानी 56%, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर रहे। रेजिडेंशियल-कमर्शियल भवन, ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, फेरस मेटल्स, ऑफशोर विंड और हैवी इंजीनियरिंग — कई कारोबारों में एक साथ बड़ी जीत मिली।

यह मोमेंटम तिमाही नतीजों तक सीमित नहीं रहा। बीते चार कारोबारी दिनों में L&T ने लगातार ऑर्डर जीते हैं, जिनकी कुल कीमत करीब ₹50,000 करोड़ है — शुक्रवार को ₹2,500-5,000 करोड़ का ऑर्डर, सोमवार को ₹10,000-15,000 करोड़ का, मंगलवार को ₹15,000 करोड़ से ज़्यादा का, और आज बुधवार को कुवैत ऑयल कंपनी से कच्चे तेल के भंडारण टैंक और एक्सपोर्ट नेटवर्क अपग्रेड के लिए एक और बड़ा EPC ऑर्डर। कंपनी इसे ₹2,500 से ₹5,000 करोड़ के दायरे का 'मेजर' ऑर्डर बता रही है।

इससे तस्वीर बदल जाती है। पहले सवाल था कि क्या Q1 का मार्जिन दबाव चिंता की बात है। अब स्पष्ट होता है कि निवेशक का ध्यान सिर्फ़ एक तिमाही के EBITDA पर नहीं, बल्कि ऑर्डर-बुक के लगातार प्रवाह पर होना चाहिए, जो भविष्य के राजस्व को दिशा देता है।

₹15 लाख करोड़ की पाइपलाइन में उलझा भरोसा

बुधवार के उछाल के बावजूद तस्वीर पूरी तरह उत्साहजनक नहीं है। पिछले एक महीने में L&T का शेयर बाज़ार से 8% पीछे रहा है, और कैलेंडर वर्ष 2026 में यह अब तक 5% गिर चुका है, जबकि इसी दौरान BSE सेंसेक्स 9% गिरा। यानी शेयर ने सापेक्ष रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है, भले ही निरपेक्ष रिटर्न नकारात्मक रहा हो।

शेयर फ़रवरी 2026 में ₹4,440 के 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर था, और मौजूदा स्तर उससे काफ़ी नीचे है। विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि की बाधाओं के बावजूद कंपनी के पास वित्त वर्ष 27 की बाकी अवधि के लिए करीब ₹15 लाख करोड़ की स्वस्थ प्रोजेक्ट पाइपलाइन मौजूद है।

तो कहानी अब मुनाफ़े के आंकड़े से आगे बढ़कर एक ज़्यादा ठोस सवाल पर टिकती है। L&T के पास ऑर्डर की कोई कमी नहीं है — तिमाही में और उसके बाद के हफ़्तों में मिली जीतें यह साबित करती हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या कंपनी पश्चिम एशिया जैसी सप्लाई चेन बाधाओं के बीच इस विशाल ऑर्डर-बुक को उसी गति से निष्पादित कर पाती है जितनी गति से उसने इसे जीता है, और क्या यह निष्पादन आने वाली तिमाहियों में सिकुड़ते EBITDA मार्जिन को पलट पाता है। यह वह चेकपॉइंट है जिस पर अगली तिमाही के नतीजे इस बहस को सुलझाएंगे।

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