हिंदुस्तान जिंक|मुनाफा 145%, शेयर फिर भी लाल

· NIFTY

रिकॉर्ड मुनाफा, फिर भी शेयर लाल

हिंदुस्तान जिंक ने जून तिमाही में शुद्ध मुनाफा 145 प्रतिशत बढ़ाकर 5,469 करोड़ रुपये कर दिया। राजस्व करीब 72 प्रतिशत उछलकर 13,033 करोड़ रुपये पहुंच गया, और EBITDA मार्जिन बढ़कर 58.6 प्रतिशत हो गया। स्वाभाविक तर्क यही कहता है कि ऐसे नतीजों पर शेयर उछलना चाहिए था। लेकिन नतीजों के दिन हिंदुस्तान जिंक का शेयर उल्टा 0.75 प्रतिशत गिरकर 527 रुपये पर आ गया।

सवाल यह है कि जब जिंक, लेड और सिल्वर तीनों कारोबार में कमाई कई गुना बढ़ी हो, तो निवेशक इसे खरीदारी के मौके की तरह क्यों नहीं देख रहे। यह विरोधाभास सिर्फ एक दिन की प्रतिक्रिया नहीं है, यह पूरे साल के प्राइस मूवमेंट में भी दिखता है।

कंपनी की सीएफओ टिप्पणियों के अनुसार शेयर ने बीते 12 महीनों में करीब 24 प्रतिशत रिटर्न दिया है, लेकिन इसी कैलेंडर वर्ष में यह करीब 13 प्रतिशत नीचे है। यानी मुनाफे की खबर एक ऐसे शेयर पर आई है जो पहले से ही साल भर की कमजोरी झेल रहा था, इसलिए बाजार इसे सिर्फ अच्छी तिमाही नहीं बल्कि लंबी तस्वीर के हिस्से के तौर पर देख रहा है।

धातु की कीमतें बनाम मांग की चिंता

तिमाही नतीजों के भीतर झांकें तो जिंक-लेड कारोबार का राजस्व 6,116 करोड़ से बढ़कर 9,146 करोड़ रुपये हो गया, जबकि सिल्वर सेगमेंट का राजस्व 1,426 करोड़ से ढाई गुना बढ़कर 3,839 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी ने खुद बताया कि यह उछाल मुख्य रूप से ऊंची धातु कीमतों और बेहतर लागत प्रबंधन से आया है, न कि उत्पादन मात्रा में बड़े इजाफे से।

यही वह जगह है जहां बाजार की सतर्कता समझ आती है। जब कमाई का बड़ा हिस्सा वस्तु कीमतों की तेजी से आया हो, तो निवेशक यह मान लेते हैं कि कीमतें पलटते ही मार्जिन भी सिकुड़ सकता है। इसलिए एक असाधारण तिमाही को स्थायी कमाई क्षमता का प्रमाण मानने में बाजार हिचक रहा है।

इसलिए असली सवाल यह नहीं रहा कि कंपनी ने कितना कमाया, बल्कि यह है कि क्या यह कमाई अगली तिमाहियों में भी टिकेगी। यही वजह है कि रिकॉर्ड नतीजे भी शेयर को तुरंत ऊपर नहीं ले जा सके।

5,000 करोड़ का दांव और आगे का रास्ता

नतीजों के दो दिन बाद कंपनी के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि हिंदुस्तान जिंक इस वित्त वर्ष में करीब 5,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करेगी, जिसमें से 80 प्रतिशत हिस्सा पहले से चल रही परियोजनाओं पर खर्च होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगले चार से पांच साल तक हर साल करीब 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत पड़ेगी ताकि कंपनी अपनी लक्षित क्षमता तक पहुंच सके।

मिश्रा के मुताबिक कंपनी के पास करीब 10 लाख टन क्षमता की पाइपलाइन है, जिसमें से ढाई लाख टन को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और उस पर 12,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। खनन उपकरणों के ऑर्डर दिए जा चुके हैं और स्मेल्टर का निर्माण शुरू हो गया है, लेकिन मिलिंग और कंसंट्रेट सुविधाओं के ऑर्डर अभी तय होने बाकी हैं।

तो इस पूरी तस्वीर को जोड़ने पर एक साफ तर्क उभरता है। कंपनी आज की रिकॉर्ड कमाई को कल की क्षमता में बदलने का दांव खेल रही है, लेकिन नई परियोजनाओं का पूरा वित्तीय ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है। जब तक मिलिंग और कंसंट्रेट सुविधाओं के ऑर्डर तय नहीं होते और अगली तिमाहियों में मार्जिन कीमतों की तेजी के बिना भी नहीं टिकता दिखता, बाजार का सतर्क रुख बना रह सकता है।

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